चंडीगढ़: अपनी निर्धारित कानूनी सजा पूरी कर चुके बंदी सिंहों की स्थायी रिहाई और पैरोल की मांग को लेकर कौमी इंसाफ मोर्चा द्वारा दिए गए 'पंजाब बंद' का राज्य भर में व्यापक असर दिखाई दे रहा है। शुक्रवार सुबह सात बजे से शुरू हुआ यह सात घंटे का सांकेतिक बंद दोपहर दो बजे तक प्रभावी रहेगा। तड़के से ही राज्य के अलग-अलग जिलों में कारोबारी और सार्वजनिक गतिविधियों की रफ्तार काफी सुस्त पड़ गई। मुख्य बाजार, निजी शिक्षण संस्थान, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और सड़कें पूरी तरह सन्नाटे की आगोश में आ चुके हैं। सरकारी व निजी बसों का संचालन ठप रहने से दूर-दराज जाने वाले आम मुसाफिरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसी क्रम में जालंधर-लुधियाना हाईवे पर स्थित परागपुर में भी सिख इंसाफ मोर्चा के सदस्यों ने गाड़ियों की आवाजाही रोक दी।
जालंधर से अमृतसर तक विरोध प्रदर्शन
बंद का आह्वान शुरू होते ही कौमी इंसाफ मोर्चा के समर्थकों और सहयोगी सिख संगठनों ने राज्य के प्रमुख चौराहों व राष्ट्रीय राजमार्गों का रुख किया। जालंधर के बेहद व्यस्त गुरु नानक मिशन चौक पर आंदोलनकारियों ने बीच सड़क धरना देकर ट्रैफिक को पूरी तरह रोक दिया।
#WATCH | Punjab | Police personnel are deployed across Amritsar city as Qaumi Insaaf Morcha has called for a 'bandh' from 7 am to 2 pm (shutdown) across Punjab today, over their demand for the release of Sikh prisoners. The bandh has been supported by various Sikh organisations.… pic.twitter.com/cYktA4rDPv
— ANI (@ANI) August 21, 2026
अमृतसर में अधिकांश पेट्रोल पंपों के शटर सुबह से ही गिरा दिए गए, वहीं गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी के मुख्य प्रवेश द्वार पर छात्र और समर्थक धरने पर बैठ गए।
क्या हैं आंदोलनकारियों की मुख्य मांगें
इस उग्र आंदोलन की मुख्य जड़ें जेलों में दशकों से बंद उन सिख कैदियों की रिहाई से जुड़ी हैं, जिनकी सजा की अवधि कानूनी रूप से समाप्त हो चुकी है। मोर्चा की मांग है कि बंदी सिंहों की अविलंब रिहाई की जाए और जगत्तार सिंह हवारा को बिना किसी देरी के पैरोल दी जाए। दरअसल, 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर चंडीगढ़ सीमा पर प्रदर्शन कर रहे आंदोलनकारियों और पुलिस के बीच तीखी झड़प हुई थी। उस दौरान पुलिस द्वारा बल प्रयोग करने और कई प्रदर्शनकारियों पर मुकदमे दर्ज करने के बाद कौमी इंसाफ मोर्चा ने इस राज्यव्यापी बंद का ऐलान किया। इस बंद को शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) सहित पंजाब के कई प्रमुख धार्मिक व सामाजिक संगठनों का खुला समर्थन मिला है। दूसरी ओर, पंजाब गौ सेवा आयोग के उपाध्यक्ष कीमती भगत ने इस चक्का जाम का विरोध जताते हुए कहा कि वे हवारा की पैरोल के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन सड़कों को इस तरह बाधित करने से आम श्रद्धालुओं और दैनिक यात्रियों को अकारण परेशानी झेलनी पड़ती है।
यात्रियों के लिए सतर्कता बरतने की सलाह
अव्यवस्था के बीच आम जनता को राहत देते हुए आयोजकों ने सभी आपातकालीन सेवाओं को बंद से पूरी तरह मुक्त रखा है। अस्पताल, एंबुलेंस, दवा की दुकानें, हवाई अड्डे जाने वाले यात्री, परीक्षा में शामिल होने वाले छात्र और विवाह समारोहों से जुड़ी गाड़ियों को बिना किसी रोक-टोक के रास्ता दिया जा रहा है। पुलिस प्रशासन ने किसी भी अप्रिय घटना से निपटने के लिए संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बल तैनात कर रखा है। बठिंडा और आसपास के सात प्रमुख धरना स्थलों वाले मार्गों पर सफर करने वाले यात्रियों को विशेष सतर्कता बरतने की सलाह दी गई है। अगर आप आज किसी जरूरी काम से घर से निकल रहे हैं, तो लंबी दूरी के सफर के लिए वैकल्पिक मार्गों की स्थिति जांचने के बाद ही प्रस्थान करें।