दिल्ली में H1N1 का बढ़ता प्रकोप, तेज बुखार-खांसी समेत ये लक्षण न करें नजरअंदाज

दिल्ली-एनसीआर में बदलते मौसम और उमस भरे वातावरण के बीच H1N1 यानी स्वाइन फ्लू के मामलों में एकाएक तेजी दर्ज की जा रही है।

Date Updated Last Updated : 21 August 2026, 02:08 PM IST
फॉलो करें:
Courtesy: AI generated

नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर में बदलते मौसम और उमस भरे वातावरण के बीच H1N1 यानी स्वाइन फ्लू के मामलों में एकाएक तेजी दर्ज की जा रही है। राष्ट्रीय राजधानी के एक प्रमुख सरकारी अस्पताल में कुछ डॉक्टरों समेत कई स्वास्थ्य कर्मी स्वाइन फ्लू की चपेट में आ चुके हैं, जिससे चिकित्सा संस्थानों में चिंता बढ़ गई है। अस्पतालों की ओपीडी में सांस संबंधी बीमारियों और तेज बुखार से पीड़ित मरीजों का तांता लगा हुआ है। गंभीर बात यह है कि कई संक्रमित मरीजों के शरीर में ऑक्सीजन का स्तर तेजी से कम हो रहा है, जिसने गंभीर श्वसन संक्रमण के खतरे को बढ़ा दिया है। 

संक्रमण के प्रमुख लक्षण और चेतावनी के संकेत

स्वाइन फ्लू के शुरुआती लक्षणों में अचानक तेज बुखार आना, सूखी खांसी, गले में खराश, सिरदर्द, ठंड लगना और शरीर में तेज दर्द होना शामिल है। इसमें मरीज को थकान और सुस्ती महसूस होती है। 

यदि मरीज को सीने में लगातार दर्द महसूस हो, चेहरा नीले पड़ने लगें या ऑक्सीजन सैचुरेशन घटने लगे, तो इसे मामूली मौसमी बुखार न समझें। ऐसे संकेत दिखने पर तुरंत नजदीकी अस्पताल पहुंचकर डॉक्टरी सलाह लेना बेहद जरूरी है। 

हाई-रिस्क ग्रुप और इलाज के सही तरीके

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बुजुर्गों, छोटे बच्चों और गर्भवती महिलाओं को इस संक्रमण के प्रति विशेष सावधानी बरतने की हिदायत दी है। इसके अलावा डायबिटीज, हृदय रोग, फेफड़ों की पुरानी बीमारी (जैसे अस्थामा) या कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्युनिटी) वाले लोगों में स्वाइन फ्लू के गंभीर होने का जोखिम सबसे ज्यादा होता है। इलाज के संदर्भ में विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि शुरुआती 48 घंटों के भीतर ओसेल्टामिविर (Oseltamivir) जैसी एंटीवायरल दवाएं बेहद असरदार साबित होती हैं। मरीजों को बिना डॉक्टरी सलाह के एंटीबायोटिक दवाओं के सेवन से बचना चाहिए, क्योंकि स्वाइन फ्लू एक वायरल इंफेक्शन है और एंटीबायोटिक केवल बैक्टीरियल इंफेक्शन होने की स्थिति में ही कारगर होती हैं। 

संक्रमण से बचाव के लिए बरतें ये सावधानियां

मानसून के इस मौसम में फ्लू के प्रसार को रोकने के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता बनाए रखना सबसे अहम है। बार-बार साबुन और पानी से हाथ धोएं, खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को रुमाल या टिश्यू से ढकें। भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें और बीमार व्यक्तियों से सुरक्षित दूरी बनाकर रखें। यदि घर में कोई व्यक्ति संक्रमित है तो उसे पर्याप्त आराम करने दें और खूब पानी पीने की सलाह दें। डॉक्टरों के अनुसार, सालाना फ्लू वैक्सीन (Influenza Vaccine) लगवाकर भी इस गंभीर इंफेक्शन के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

सम्बंधित खबर