एंटी-ड्रग क्लब, 500 मीटर के ड्रग फ्री ज़ोन और सूचना पेटियाँ पंजाब के स्कूलों को नशा-मुक्त बनाने के प्रमुख उपाय

मुख्यमंत्री भगवंत मान सरकार के नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ के तहत पंजाब के सभी स्कूलों में नशे के दुरुपयोग और इसके दुष्परिणामों को लेकर छात्रों को जागरूक किया जाएगा।

Date Updated Last Updated : 21 August 2026, 02:20 PM IST
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Courtesy: X//@BhagwantMann

चंडीगढ़: मुख्यमंत्री भगवंत मान सरकार के नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ के तहत पंजाब के सभी स्कूलों में नशे के दुरुपयोग और इसके दुष्परिणामों को लेकर छात्रों को जागरूक किया जाएगा। इसके साथ ही विद्यार्थियों को स्वस्थ और नशा-मुक्त जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करने के उद्देश्य से पूरे शैक्षणिक वर्ष में अलग-अलग गतिविधियां आयोजित करने के निर्देश दिए गए हैं।

पूरे साल होंगी अलग-अलग जागरूकता गतिविधियां

स्टेट काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग (SCERT) की ओर से जारी गतिविधि कैलेंडर के अनुसार, स्कूलों में सालभर छात्रों, शिक्षकों और स्कूल समुदाय के अन्य सदस्यों की भागीदारी से विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अगस्त में छात्र नशा विरोधी संदेशों वाले पोस्टर तैयार करेंगे।

सितंबर का महीना विशेष रूप से अभिभावकों को इस अभियान से जोड़ने के लिए निर्धारित किया गया है। स्कूलों को अभिभावक-शिक्षक बैठकों (PTM) के जरिए माता-पिता को नशीले पदार्थों से जुड़े खतरों, नशे की समस्या के शुरुआती संकेतों की पहचान और समय पर हस्तक्षेप के महत्व के बारे में जागरूक करने के निर्देश दिए गए हैं।

कविता और क्विज के जरिए भी जागरूकता

अक्टूबर में स्कूलों में नशा विरोधी विषयों पर कविता लेखन और क्विज प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएंगी। नवंबर से फरवरी तक जागरूकता कार्यशालाओं के साथ स्थानीय समुदाय के लोगों को भी आमंत्रित किया जाएगा, ताकि वे अपने अनुभव छात्रों के साथ साझा कर सकें।

स्कूलों की प्रार्थना सभाओं में नशा विरोधी शपथ दिलाई जाएगी। इसके अलावा, छात्रों के साथ संवादात्मक सत्र आयोजित किए जाएंगे, जिनमें उन्हें नशे से होने वाले नुकसान और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के तरीकों की जानकारी दी जाएगी।

स्कूलों में बनेंगे ड्रग-फ्री क्लब

स्कूलों को ड्रग-फ्री क्लब बनाने के निर्देश भी दिए गए हैं। इन क्लबों में शिक्षक, प्राचार्य और गैर-शिक्षण कर्मचारी सदस्य होंगे। इन क्लबों के माध्यम से रचनात्मक और संवादात्मक गतिविधियों के जरिए नशा विरोधी जागरूकता फैलाने पर जोर दिया जाएगा। सरकार का उद्देश्य छात्रों को केवल पारंपरिक भाषणों तक सीमित रखने के बजाय उन्हें इस अभियान से सक्रिय रूप से जोड़ना है। स्वस्थ जीवनशैली और सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने पर आधारित गतिविधियों को भी कार्यक्रम में शामिल किया जाएगा।

21 हजार से अधिक शिक्षकों को किया जा रहा प्रशिक्षित

अभियान के तहत ऐसे शिक्षकों की पहचान करने पर भी जोर दिया जा रहा है, जो छात्रों में नशे से जुड़ी समस्याओं को पहचानने और उनसे निपटने के तरीके समझते हों। 21,000 से अधिक शिक्षकों को छात्रों में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और नशे के शुरुआती संकेतों की पहचान करने के साथ-साथ समय रहते हस्तक्षेप के लिए जरूरी कौशल और व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इसके अलावा, स्कूल छात्रों को नशीले पदार्थों के सेवन से होने वाले जोखिम और दुष्परिणामों के बारे में जानकारी देने के लिए वीडियो आधारित एंटी-ड्रग पाठ्यक्रम का भी इस्तेमाल करेंगे।

स्कूलों में लगेंगी गुमनाम सूचना पेटियां

जागरूकता कार्यक्रमों के साथ स्कूलों को गुमनाम सूचना पेटियां लगाने के लिए भी प्रोत्साहित किया गया है। इनके जरिए छात्र नशीले पदार्थों के संभावित सेवन या इससे जुड़े अन्य मामलों की जानकारी बिना अपनी पहचान बताए दे सकेंगे। शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने कहा, “नशे के खिलाफ लड़ाई कक्षाओं से शुरू होनी चाहिए। शिक्षा और रोकथाम नशे के खिलाफ इस निर्णायक लड़ाई में हमारे सबसे शक्तिशाली हथियार हैं। जागरूकता, मूल्यों और अनुशासन के जरिए युवा मन की रक्षा करना ही पंजाब में नशे की समस्या को खत्म करने का एकमात्र स्थायी रास्ता है।”

स्कूलों के आसपास 500 मीटर का क्षेत्र होगा नशा-मुक्त

जारी निर्देशों के अनुसार, स्कूलों को यह सुनिश्चित करना होगा कि उनके परिसर के आसपास 500 मीटर का क्षेत्र नशा-मुक्त रहे। स्कूलों को समय-समय पर इसके अनुपालन की रिपोर्ट भी देनी होगी। अभियान की गतिविधियों की निगरानी के लिए एक विशेष व्यवस्था भी अनिवार्य की गई है। स्कूल प्रमुखों और मेंटर्स को सभी गतिविधियों की समीक्षा करने के साथ-साथ तस्वीरों सहित उनका रिकॉर्ड सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं।

सालभर चलने वाला यह गतिविधि कैलेंडर पंजाब सरकार के व्यापक ‘युद्ध नशेआं विरुद्ध’ अभियान का हिस्सा है। इसका उद्देश्य छात्रों की भागीदारी, शिक्षकों की क्षमता बढ़ाने, शैक्षिक सामग्री और सामुदायिक सहयोग को एक साथ जोड़कर स्कूलों में नशे की रोकथाम के लिए एक सतत व्यवस्था तैयार करना है।

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