नौकरी और बड़ी डिग्री भी नहीं बदलेंगी पहचान! हाईकोर्ट ने कहा- परिवार संभालने वाली महिला ‘गृहिणी’

कर्नाटक हाईकोर्ट ने ‘गृहिणी’ की भूमिका को लेकर टिप्पणी करते हुए कहा है कि नौकरी या ऊंची डिग्री होने के बावजूद घर और परिवार की देखभाल करने वाली महिला को ‘गृहिणी’ माना जा सकता है.

Date Updated Last Updated : 21 August 2026, 12:17 PM IST
फॉलो करें:
Courtesy: AI generated

नई दिल्ली: कर्नाटक हाईकोर्ट ने ‘गृहिणी’ की भूमिका को लेकर एक अहम टिप्पणी की है. अदालत ने कहा कि किसी महिला की पहचान केवल उसकी पढ़ाई या नौकरी से तय नहीं होती. अगर वह अपने परिवार की देखभाल और घर की जिम्मेदारियों में योगदान देती है, तो उसे गृहिणी माना जा सकता है. इसके लिए महिला का अनपढ़ होना या सिर्फ घर के काम करना जरूरी नहीं है.

सड़क हादसे से जुड़े मामले में आया फैसला

यह मामला कर्नाटक राज्य सड़क परिवहन निगम (KSRTC) की बस से हुए सड़क हादसे से जुड़ा था. रिपोर्ट के अनुसार, बायोटेक्नोलॉजी में पोस्ट ग्रेजुएट एक महिला 2013 में बस दुर्घटना में घायल हो गई थी. उस समय उसके लेक्चरर के तौर पर काम करने की बात सामने आई थी.

महिला ने हादसे के कारण हुई आर्थिक क्षति का हवाला देते हुए अधिक मुआवजे की मांग की थी. हालांकि, मोटर दुर्घटना दावा ट्रिब्यूनल ने उसकी संभावित कमाई के आधार पर मुआवजा देने से इनकार कर दिया था. KSRTC ने भी महिला के नौकरीपेशा होने का पुख्ता सबूत नहीं होने की दलील दी थी.

हाईकोर्ट ने क्या कहा?

कर्नाटक हाईकोर्ट ने KSRTC की दलील को स्वीकार नहीं किया. अदालत ने कहा कि किसी महिला के पास डिग्री, पोस्ट ग्रेजुएशन या डॉक्टरेट की उपाधि होने से यह साबित नहीं होता कि वह गृहिणी नहीं हो सकती.

अदालत के मुताबिक, घर और परिवार की देखभाल में योगदान देने वाली कामकाजी या पेशेवर महिला को भी गृहिणी माना जा सकता है. इसके लिए यह साबित करना जरूरी नहीं कि वह अनपढ़ है, हर समय घर पर रहती है या सिर्फ घरेलू काम करती है.

मुआवजे के लिए तय की गई काल्पनिक आय

अदालत ने महिला के नौकरी करने का पर्याप्त प्रमाण नहीं मिलने पर उसकी काल्पनिक आय 8,000 रुपये प्रति माह मानी. चोटों के कारण करीब तीन महीने तक परिवार की सेवा नहीं कर पाने को भी आर्थिक नुकसान के रूप में देखा गया. इस आधार पर 24,000 रुपये की राशि तय की गई. इसके अलावा ट्रिब्यूनल की रकम से अलग 1,96,800 रुपये का अतिरिक्त मुआवजा देने का आदेश दिया गया.

कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि ‘होममेकर’ की भूमिका सिर्फ महिलाओं तक सीमित नहीं है. घर की जिम्मेदारियां संभालने वाला पुरुष या महिला, दोनों इस भूमिका में हो सकते हैं.

सम्बंधित खबर