किस दिन मनाया जाएगा तुलसी विवाह? जानें तिथि और महत्व

हिंदू परंपरा में तुलसी विवाह विशेष स्थान रखता है. यह कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वादशी को मनाया जाता है. इस दिन कुछ भक्त देवउठनी एकादशी पर भी यह अनुष्ठान करते हैं. इस त्योहार के दौरान तुलसी पौधे को भगवान विष्णु के शालिग्राम रूप से विवाह कराया जाता है.

Date Updated Last Updated : 28 October 2025, 03:06 PM IST
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Courtesy: Pinterest

हिंदू परंपरा में तुलसी विवाह विशेष स्थान रखता है. यह कार्तिक शुक्ल पक्ष की द्वादशी को मनाया जाता है. इस दिन कुछ भक्त देवउठनी एकादशी पर भी यह अनुष्ठान करते हैं. इस त्योहार के दौरान तुलसी पौधे को भगवान विष्णु के शालिग्राम रूप से विवाह कराया जाता है. मान्यता है कि इससे कन्यादान का पुण्य मिलता है.  

तुलसी विवाह उस घर के लिए और भी ज्यादा खास है. जिस घर में पुत्री नहीं होती है. ऐसे परिवारों के लिए यह विशेष फलदायी है. इस त्योहार के मनाने से जीवन में सुख-समृद्धि बढ़ती है. पंचांग के अनुसार, इस साल तुलसी विवाह 2 नवंबर को होगा. इस दिन कार्तिक शुक्ल द्वादशी है. द्वादशी पर विवाह चाहने वाले लोग 2 नवंबर के दिन को चुन सकते हैं. इसके अलावा देवउठनी एकादशी से कार्तिक पूर्णिमा तक का समय शुभ है, कोई भी दिन चुन सकते हैं.  

कैसे करें तुलसी पूजा?

तुलसी विवाह के दिन सुबह सूर्योदय से पहले उठें और फिर स्नान करें. अब तुलसी पौधे को साफ जगह पर रख कर रंगोली बनाएं. इसके बाद भगवान शालिग्राम को वहां स्थापित करें और मंडप तैयार करें. अगर आपके पास सामान हो तो आप जगह को फूल, आम पत्ते, केले के तने से सजा सकते हैं. पूजा करने के लिए सबसे पहले शालिग्राम भगवान को पंचामृत और गंगाजल से स्नान कराएं. इसके बाद भगवान शालिग्राम को नए वस्त्र पहनाएं और तुलसी को लाल चुनरी ओढ़ाएं. अब फूल माला चढ़ा कर सात परिक्रमा करें फिर आरती उतार कर अपनों के साथ प्रसाद खाएं. 

तुलसी पूजा क्यों जरुरी?

इस पूजा के कई लाभ है. माना जाता है कि इस पूजा को करने से परिवार में प्यार बढ़ता है. खास कर अगर आपकी नई शादी हुई है तो आप इस पूजा को अपने साथी के साथ संपन्न करें. इस पूजा में तुलसी को दुल्हन, शालिग्राम को दूल्हा बनाते हैं और मंत्रों से विवाह संपन्न होता है. माना जाता है कि इस पूजा से घर में पवित्रताभी आती है और घर में उत्सव का माहौल भी बनता है. ऐसे में आप 2 नवंबर को त्योहार जरूर मनाएं और अपने घर पर मां तुलसी और भगवान शालिग्राम को आमंत्रित करें. 

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