बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान से मिले एस जयशंकर, सौंपा शोक पत्र

बांग्लादेश की राजनीति में एक युग का अंत हो गया है. तीन बार प्रधानमंत्री रहीं और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की लंबे समय तक चेयरपर्सन बेगम खालिदा जिया का मंगलवार को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया.

Date Updated Last Updated : 31 December 2025, 02:08 PM IST
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Courtesy: X (@hamidullah_riaz)

बांग्लादेश की तीन बार प्रधानमंत्री रहीं और बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) की लंबे समय तक चेयरपर्सन बेगम खालिदा जिया का मंगलवार को लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया.उनके निधन से न केवल बांग्लादेश बल्कि पूरे दक्षिण एशिया में शोक की लहर दौड़ गई है.

बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी ने आधिकारिक बयान में बताया कि बेगम खालिदा जिया का निधन मंगलवार सुबह फज्र की नमाज के तुरंत बाद हुआ. वे काफी समय से विभिन्न रोगों से जूझ रही थीं. इस मौके पर भारत की ओर से विदेश मंत्री एस जयशंकर बांग्लादेश पहुंचे हैं. 

अंतिम संस्कार की व्यवस्थाएं

खालिदा जिया का अंतिम संस्कार बुधवार दोपहर 2 बजे मानिक मिया एवेन्यू के दक्षिणी प्लाजा में आयोजित किया जाएगा. यह एक राजकीय समारोह होगा, जिसमें विदेशी गणमान्य व्यक्ति, राजनीतिक नेता और विभिन्न देशों के प्रतिनिधि शामिल होंगे. समारोह के बाद दोपहर करीब 3:30 बजे उन्हें उनके पति, दिवंगत राष्ट्रपति जियाउर रहमान के बगल में राजकीय सम्मान के साथ दफनाया जाएगा. बांग्लादेश की अंतरिम सरकार ने तीन दिन का राजकीय शोक घोषित किया है और अंतिम संस्कार के दिन सार्वजनिक अवकाश रखा है.

भारत की ओर से श्रद्धांजलि

भारत सरकार की ओर से विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर बुधवार को ढाका पहुंचे और अंतिम संस्कार में शामिल होकर भारत के लोगों तथा सरकार की संवेदना व्यक्त की. वे विशेष विमान से सुबह 11:30 बजे ढाका पहुंचे, जहां भारतीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने उनका स्वागत किया. जयशंकर ने खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान से मुलाकात कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का शोक संदेश सौंपा. भारत में बांग्लादेश के उच्चायुक्त रियाज हमीदुल्लाह ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि जयशंकर ने लोकतंत्र में खालिदा जिया के योगदान को सराहा और भारत की ओर से गहन शोक व्यक्त किया.

प्रधानमंत्री मोदी ने भी अपने संदेश में खालिदा जिया को बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बताते हुए उनके देश के विकास और भारत-बांग्लादेश संबंधों में योगदान को याद किया. उन्होंने 2015 में ढाका में हुई अपनी मुलाकात को गर्मजोशी से याद किया. पाकिस्तान, चीन और अन्य देशों ने भी उनके निधन पर शोक व्यक्त किया है. उनके बेटे तारिक रहमान, जो लंबे निर्वासन के बाद हाल ही में वापस लौटे हैं, ने मां के निधन पर गहरा दुख जताया. 

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