नई दिल्ली: बांग्लादेश की राजनीति ने एक बार फिर चौंकाने वाला मोड़ लिया है. जिन तीन नेताओं के नाम कभी गंभीर आपराधिक मामलों और यहां तक कि मौत की सजा से जुड़े थे, वही अब नई संसद की दहलीज पर खड़े हैं. सत्ता परिवर्तन और न्यायिक फैसलों के बाद बदली परिस्थितियों ने इन नेताओं की किस्मत पलट दी है, जिससे क्षेत्रीय राजनीति में नई बहस छिड़ गई है.
हालिया राष्ट्रीय चुनाव में बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (बीएनपी) ने जीत दर्ज की. पार्टी के कार्यवाहक प्रमुख तारिक रहमान के नेतृत्व में यह जीत आई है. दिलचस्प बात यह है कि उनकी पार्टी के दो नेता लुत्फोज्जमान बाबर और अब्दुस सलाम पिंटू और जमात-ए-इस्लामी के वरिष्ठ नेता एटीएम अजहरुल इस्लाम, जो पहले गंभीर आरोपों में घिरे थे, अब वह संसद पहुंचने वाले हैं. इन तीनों को पहले कई मामलों में दोषी ठहराया गया था, लेकिन बाद में अदालत की ओर से उन्हें राहत मिल गई है.
21 अगस्त 2004 को शेख हसीना को निशाना बनाकर एक ग्रेनेड हमला किया गया था. जिसमें करीब 24 लोगों की मौत हुई थी. इस मामले में तारिक रहमान और लुत्फोज्जमान बाबर समेत कई लोगों को दोषी ठहराया गया था. हालांकि दिसंबर 2024 में उच्च न्यायालय ने उन्हें बरी कर दिया. जिसके बाद बाबर ने अब हालिया चुनाव में अपने प्रतिद्वंद्वी को करीब 1.6 लाख वोटों से हराया.
बता दें अब्दुस सलाम पिंटू ने हाल में हुए राष्ट्रीय चुनाव में दो लाख से ज्यादा मतों के अंतर से जीत दर्ज की है. लेकिन इससे पहले आरोप लगे थे कि पिंटू पाकिस्तान समर्थित आतंकी संगठन हरकत-उल-जिहाद-अल-इस्लामी (हुजी) से संबंध रखता है. इस संगठन का नाम भारत में वाराणसी, अजमेर और दिल्ली में हुए धमाकों से भी जोड़ा गया था.
अब एटीएम अजहरुल इस्लाम के बारे में बात की जाए तो उसके ऊपर 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान 1,200 से ज्यादा लोगों की हत्या और कई अन्य गंभीर अपराधों के आरोप लगे थे. 2014 में उसे मौत की सजा भी सुनाई गई थी, लेकिन बाद में उसे माफी मिल गई थी.