नई दिल्ली: बांग्लादेश में पार्लियामेंट्री इलेक्शन से ठीक पहले हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है. सबसे नई घटना मैमनसिंह जिले में हुई, जहां सोमवार रात एक हिंदू बिजनेसमैन की उसकी दुकान के अंदर हत्या कर दी गई. सुशेन चंद्र सरकार की मौत से लोकल कम्युनिटी डर गई है. पुलिस अब घटना के पीछे के असली मकसद की जांच कर रही है. बढ़ती भीड़ की हिंसा और हमलों ने देश का माहौल पहले ही काफी सेंसिटिव और टेंशन वाला बना दिया है.
सुशेन चंद्र सरकार त्रिशाल उपजिला के बोगर बाजार में M/s भाई भाई एंटरप्राइज नाम से चावल की दुकान चलाते थे. सोमवार रात करीब 11:00 बजे वह दुकान के अंदर थे, तभी अनजान हमलावरों ने उन पर धारदार हथियारों से हमला कर दिया. हत्या के बाद क्रिमिनल्स ने बॉडी को अंदर ही छोड़ दिया और दुकान का शटर बंद करके भाग गए. पुलिस अब इस जघन्य हत्या की हर एंगल से अच्छी तरह जांच कर रही है.
बांग्लादेश में माइनॉरिटीज पर हमलों का सिलसिला पिछले कुछ महीनों से लगातार जारी है. इसकी शुरुआत रेडिकल स्टूडेंट लीडर शरीफ उस्मान हादी की मौत के बाद हुई. 18 दिसंबर को भीड़ ने दीपू चंद्र दास नाम के एक कर्मचारी को भी मार डाला और ईशनिंदा के आरोप में उसे आग लगा दी. ये घटनाएं दिखाती हैं कि देश में कितनी अराजकता है और किस हद तक बेगुनाह लोग कट्टरपंथ का शिकार हो रहे हैं.
राजबाड़ी जिले में अमृत मंडल नाम के एक आदमी को भीड़ ने पीट-पीटकर मार डाला. हालांकि पुलिस ने उसे दोषी ठहराया, लेकिन सड़कों पर भीड़ का इंसाफ एक खतरनाक ट्रेंड बन गया है. पिछले साल कालीगंज में हिंदू व्यापारी लिटन चंद्र दास भी ऐसी ही भीड़ की हिंसा का शिकार हुए थे. स्थानीय लोग अब अपनी जान और माल की सुरक्षा को लेकर बहुत चिंतित हैं, क्योंकि ऐसा लगता है कि अपराधियों को कानून का कोई डर नहीं है.
हिंसा की यह लहर सिर्फ धार्मिक या राजनीतिक विवादों तक ही सीमित नहीं है. हाल ही में, पेट्रोल पंप के कर्मचारी रिपन साहा की हत्या तब कर दी गई जब उन्होंने बिना पैसे दिए भाग रही एक गाड़ी को रोकने की कोशिश की. देश के अलग-अलग हिस्सों से ऐसी खबरें चुनावों से पहले नागरिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा रही हैं. प्रशासन के दावों के बावजूद, अल्पसंख्यक समुदायों में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है.