चीन ने पहाड़ों में खोदकर बनाए गुप्त परमाणु ठिकाने! सैटेलाइट तस्वीरों से खुलासा

नई रिपोर्ट के मुताबिक सिचुआन में जितोंग घाटी में इंजीनियर नए बंकर और मजबूत दीवारें बना रहे हैं. यहां एक नया कॉम्प्लेक्स बनाया गया है, जिसमें पाइपों का जाल बिछा है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह जगह खतरनाक सामग्री हैंडल करने के लिए इस्तेमाल हो रही है.

Date Updated Last Updated : 16 February 2026, 01:02 PM IST
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नई दिल्ली: हाल ही में चीन के खतरनाक इरादों का खुलासा हुआ है. जी हां सैटेलाइट इमेजरी से पता चला है कि चीन दक्षिण-पश्चिमी प्रांत सिचुआन की पहाड़ी घाटियों में गुप्त रूप से परमाणु हथियारों से जुड़ी सुविधाओं का विस्तार कर रहा है. ये निर्माण 2019 से तेज हुए हैं और 2022 से 2026 तक की तस्वीरों में साफ दिख रहे हैं.

न्यूयॉर्क टाइम्स की नई रिपोर्ट के मुताबिक सिचुआन में जितोंग घाटी में इंजीनियर नए बंकर और मजबूत दीवारें बना रहे हैं. यहां एक नया कॉम्प्लेक्स बनाया गया है, जिसमें पाइपों का जाल बिछा है. विशेषज्ञों का मानना है कि यह जगह खतरनाक सामग्री हैंडल करने के लिए इस्तेमाल हो रही है. यहां हाई एक्सप्लोसिव टेस्टिंग की सुविधाएं भी हैं, जहां परमाणु हथियारों में इस्तेमाल होने वाले केमिकल चार्जेस का परीक्षण होता है.

दूसरी तरफ पिंगटोंग नाम की जगह पर डबल फेंस वाली सुविधा है. यहां प्लूटोनियम से भरे न्यूक्लियर वॉरहेड कोर बनाए जा रहे हैं. मुख्य बिल्डिंग में 360 फुट ऊंची वेंटिलेशन स्टैक है, जिसे नए वेंट और हीट डिस्पर्सर से अपग्रेड किया गया है. आसपास और निर्माण कार्य चल रहा है. प्रवेश द्वार पर राष्ट्रपति शी जिनपिंग का नारा लिखा है- 'संस्थापक उद्देश्य के प्रति सच्चे रहें और हमेशा हमारे मिशन को याद रखें.'

यह जगह अमेरिका के लॉस एलामोस लैब जैसी प्लूटोनियम पिट प्रोडक्शन साइट्स से मिलती-जुलती है.

जियोस्पेशल इंटेलिजेंस एक्सपर्ट रेनी बाबियार्ज के अनुसार 2019 से ये बदलाव तेज हुए हैं. ये चीन की रणनीतिक क्षमता बढ़ाने की कोशिश का हिस्सा हैं, खासकर अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच. पेंटागन के अनुमान से 2024 के अंत तक चीन के पास 600 से ज्यादा परमाणु हथियार हो चुके हैं. 2030 तक यह संख्या 1,000 से अधिक हो सकती है. हालांकि चीन अभी भी अमेरिका और रूस से काफी पीछे है. 

भारत के लिए यह चिंता की बात है क्योंकि सिचुआन भारत की सीमा के नजदीक है. विशेषज्ञों का कहना है कि चीन का परमाणु विस्तार न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक सुरक्षा के लिए खतरा है. हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के भौतिक विज्ञानी हूई झांग ने कहा कि ये बदलाव नए हथियार सिस्टम जैसे सबमरीन-लॉन्च्ड मिसाइल के लिए हो सकते हैं. अमेरिका चिंतित है कि बड़ा परमाणु भंडार चीन को ताइवान जैसे मुद्दों पर ज्यादा आक्रामक बना सकता है. वैश्विक न्यूक्लियर आर्म्स कंट्रोल समझौते कमजोर हो रहे हैं, जिससे स्थिति और गंभीर है. 

ये खुलासा सैटेलाइट इमेज से हुआ है, जो एयरबस जैसी कंपनियों से ली गई हैं. चीन के असली इरादे अभी पूरी तरह साफ नहीं हैं, लेकिन ये निर्माण उसकी सुपरपावर बनने की महत्वाकांक्षा दिखाते हैं. दुनिया भर में परमाणु हथियारों पर तनाव बढ़ रहा है और चीन का यह अभियान चिंता का बड़ा कारण बन गया है.

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