नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट के गलियारों में उस समय माहौल गर्म हो गया, जब पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मतदाता सूची के विशेष गहन संशोधन (SIR) याचिका की सुनवाई हुई. उन्होंने इसे लेकर अब अपनी नाराज़गी खुलकर सामने रखी. उन्होंने अदालत में प्रवेश करते ही कहा कि 'न्याय मानो बंद दरवाज़ों के पीछे चीख रहा है', और इसी के साथ चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए.
ममता बनर्जी आज दोपहर भारत के मुख्य न्यायाधीश के कक्ष में अपनी याचिका पर बहस के लिए पहुंचीं. उन्होंने मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत से कुछ समय मांगा ताकि वह अपनी बात रख सकें. शुरुआत में उन्हें पांच मिनट देने की बात कही गई, लेकिन बाद में अदालत ने उन्हें पीठ के समक्ष 15 मिनट तक अपनी दलीलें रखने की अनुमति दी.
मुख्यमंत्री ने अपनी बात की शुरुआत इस आरोप से की कि भारतीय चुनाव आयोग ने उनकी शिकायतों को पूरी तरह नजरअंदाज किया है. उन्होंने कहा कि उन्होंने इस मुद्दे पर चुनाव आयोग को छह बार पत्र लिखा, लेकिन आज तक कोई ठोस जवाब नहीं मिला. उनके अनुसार, यही सबसे बड़ी समस्या है कि शिकायत करने के बावजूद न्याय का कोई रास्ता नजर नहीं आता.
VIDEO | Delhi: West Bengal CM Mamata Banerjee reaches Supreme Court for hearing of a plea filed by her challenging the ongoing Special Intensive Revision (SIR) of electoral rolls in the state.
— Press Trust of India (@PTI_News) February 4, 2026
(Full video available on PTI Videos - https://t.co/n147TvrpG7) pic.twitter.com/bffRWFgBYY
ममता बनर्जी की दलीलों के दौरान उनका स्वर काफी आक्रामक रहा. वह बेहग आक्रोशित नजर आ रही थी.
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मतदाता सूची की पारदर्शिता बेहद अहम है और अगर इस पर ही सवाल उठें, तो यह पूरे चुनावी तंत्र के लिए चिंता की बात है.
इसके साथ ही एक बार फिर चुनाव प्रक्रिया, पारदर्शिता और संवैधानिक संस्थाओं की जवाबदेही पर राष्ट्रीय बहस को तेज कर दिया है.
पीठ ने मुख्यमंत्री की याचिका को गंभीरता से लेते हुए कहा कि हर समस्या का समाधान संभव है. सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर दिया है और स्पष्ट किया कि सभी पक्षों को सुना जाएगा. अदालत ने संकेत दिया कि मामले की विस्तार से सुनवाई की जाएगी. इस याचिका पर अगली सुनवाई सोमवार को तय की गई है.