Dhananjay Singh: प्रतिबंधित कोडीन युक्त कफ सिरप की तस्करी से जुड़े एक बड़े अवैध सिंडिकेट के खुलासे के बाद पूर्व सांसद और जौनपुर के प्रभावशाली नेता धनंजय सिंह का नाम सोशल मीडिया पर चर्चा में है. मामले में अपना नाम सामने आने पर उन्होंने इसे राजनीतिक साजिश बताया है और केंद्र व राज्य सरकार से सीबीआई जांच की मांग की है. उन्होंने इस पूरे विवाद पर एक्स हैंडल के माध्यम से लगातार अपनी सफाई पेश की है.
खत्म हो जाएंगे निराधार आरोप
धनंजय सिंह ने अपने पोस्ट में लिखा कि उनके राजनीतिक विरोधी जानबूझकर भ्रम फैलाने और झूठी खबरें प्रसारित करने में लगे हुए हैं. उनका कहना है कि यह पूरा मामला वाराणसी से जुड़ा है, इसलिए कुछ विपक्षी दल और कांग्रेस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि यदि मामले की निष्पक्ष सीबीआई जांच हो, तो असली दोषियों का पर्दाफाश होगा और उन पर लगाए जा रहे निराधार आरोप खत्म हो जाएंगे.
नमस्ते प्रिय साथियों।
— Dhananjay Singh (@MDhananjaySingh) November 29, 2025
मुझे पता है कि कफ़ सिरफ़ के मुद्दे पर मेरे कुछ राजनैतिक विरोधियों ने पत्रकार बंधुओं को गुमराह कर के मेरे बारे में भ्रामक्ता फैलाने का कृत्य किया है।
इस सम्बन्ध में मैं आपको अवगत कराना चाहता हूँ कि प्रकरण काशी/वाराणसी से जुड़ा होने के कारण कांग्रेस और अन्य… pic.twitter.com/51xyhPOU1D
उन्होंने आगे कहा कि जो लोग उनके नाम का इस्तेमाल कर राजनीतिक लाभ उठाने की फिराक में हैं, उन्हें जल्द ही जनता और कानून दोनों के सामने जवाब देना पड़ेगा. धनंजय सिंह के अनुसार, सत्य जल्द सामने आएगा और झूठ पर आधारित राजनीति टिक नहीं पाएगी.
इस पूरे विवाद का संदर्भ पिछले दिनों उत्तर प्रदेश पुलिस और ड्रग कंट्रोल विभाग की संयुक्त कार्रवाई से जुड़ा है. टीम ने प्रदेश के कई जिलों में छापेमारी कर प्रतिबंधित कफ सिरप की अवैध सप्लाई चेन को तोड़ने का प्रयास किया. इस दौरान कई बड़े नाम जांच के दायरे में आए. सोशल मीडिया पर इन्हीं छापेमार कार्रवाइयों के बीच धनंजय सिंह का नाम भी जोड़ा जा रहा है. हालांकि उन्होंने इन दावों को पूरी तरह निराधार बताया और कहा कि यह महज राजनीतिक द्वेष का परिणाम है.
उभरना राजनीतिक हलकों में चर्चा
धनंजय सिंह पूर्वांचल की राजनीति में एक मजबूत और सक्रिय चेहरा माने जाते हैं. 2014 में वे बसपा के टिकट पर जौनपुर से सांसद चुने गए थे. बाद में उन्होंने अलग राजनीतिक मार्ग अपनाते हुए खुद को एक स्वतंत्र शक्ति के रूप में स्थापित किया. वर्तमान में वे 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारी में जुटे हुए हैं. ऐसे में इस प्रकरण का उभरना राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बना हुआ है.
अब सबकी नजर इस बात पर है कि उनकी सीबीआई जांच की मांग पर केंद्र और राज्य सरकार क्या रुख अपनाती है. यह भी देखा जाना बाकी है कि कफ सिरप तस्करी का यह मामला पूर्वांचल की राजनीति पर कितना असर डालता है और इसकी जांच क्या नया मोड़ लेकर आती है.