एआई-171 दुर्घटना जांच पर खड़े हुए सवाल, पायलटों पर दोष मढ़ने के आरोप के बीच रिश्तेदार पायलट को भेजा समन

एयर इंडिया की फ्लाइट AI 171 क्रैश मामले की जांच एक और नए विवाद में घिर गई है. भारतीय पायलट संघ ने विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) को कानूनी नोटिस भेजा है. अब दिवंगत कैप्टन सुमित सभरवाल के भतीजे कैप्टन वरुण आनंद को समन भेजा.

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Courtesy: @Fahadnaimb

नई दिल्ली: एयर इंडिया की फ्लाइट AI 171 क्रैश मामले की जांच एक और नए विवाद में घिर गई है. भारतीय पायलट संघ ने विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) को कानूनी नोटिस भेजा है. यह विवाद उस समय उत्पन्न हुआ जब जांच के सिलसिले में दिवंगत कैप्टन सुमित सभरवाल के भतीजे कैप्टन वरुण आनंद को समन भेजा गया. कैप्टन आनंद उस समय एयर इंडिया की उड़ान एआई-171 चला रहे थे.

एयर इंडिया ने कैप्टन आनंद को सूचित किया कि उन्हें विमान दुर्घटना जांच में तलब के लिए बुलाया गया है. हालांकि, फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) ने इस कदम पर आपत्ति जताई है. संघ ने कहा कि जांच ब्यूरो ने स्पष्ट नहीं किया कि उन्हें इसमें क्यों  शामिल किया गया.

कैप्टन आनंद नहीं थे उड़ान का हिस्सा 

 फेडरेशन ऑफ इंडियन पायलट्स (FIP) इस फैसले से काफी नाराज है. उन्होंने कहा कि कैप्टन आनंद का एआई-171 दुर्घटना से कोई संबंध नहीं है. वे उस उड़ान का हिस्सा नहीं थे, न ही दुर्घटना स्थल पर मौजूद थे. इसके अलावा, वे न तो तथ्यात्मक गवाह हैं, न तकनीकी गवाह, और न ही विशेषज्ञ गवाह. कुल मिलाकर, उनके पास जांच के लिए कोई सीधे प्रमाण या जानकारी नहीं है. उसके बावजूद उन्हें इस मामले में घसीटा जा रहा है. 

क्या दिवंगत पायलट पर दोष लगाने की हो रही कोशिश

इस घटना के बाद आशंका जताई जा रही है कि संघ दिवंगत पायलट पर दुर्घटना का दोष डाल सकता है. पायलट संघ ने कहा कि कैप्टन आनंद को इसलिए तलब किया गया क्योंकि वे कैप्टन सभरवाल के रिश्तेदार हैं. संघ का मानना है कि जांचकर्ता पहले से ही एक कहानी तय कर चुके हैं और दुर्घटना में मृत विमान चालक दल पर दोष लगाने की कोशिश कर रहे हैं.

जांच के दौरान पारिवार के सदस्यों को बुलाना है गैरकानूनी

बता दें फेडरेशन ने अंतर्राष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (ICAO) के नियमों का हवाला देते हुए कहा कि जांच के दौरान परिवार के सदस्यों को बुलाना गैरकानूनी है. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कैप्टन आनंद वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश होने के लिए तैयार हैं. इस विवाद ने विमान दुर्घटना की जांच की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए हैं.