पुतिन और पीएम मोदी की मेजबानी के लिए तैयार शी जिनपिंग, SCO बैठक में त्रिपक्षीय वार्ता की संभावना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले हफ्ते चीन के तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले हैं. पीएम मोदी सात साल बाद पहली चीन यात्रा करेंगे.

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Courtesy: Social Media

SCO Summit: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अगले हफ्ते चीन के तियानजिन में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले हैं. पीएम मोदी सात साल बाद पहली चीन यात्रा करेंगे. विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) तन्मय लाल ने बताया कि मोदी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के निमंत्रण पर 31 अगस्त और 1 सितंबर को होने वाली इस बैठक में शामिल होंगे. इस दौरान कुछ द्विपक्षीय वार्ताएं भी हो सकती हैं.

ससीओ में इन तीन देशों के अलावा ईरान, बेलारूस समेत कई देश शामिल हैं. यह संगठन आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद से लड़ने के लिए बनाया गया है. भारत 2017 से इसका पूर्ण सदस्य है और पहले 2005 से पर्यवेक्षक रहा. इस शिखर सम्मेलन में वैश्विक दक्षिण की एकजुटता और बीजिंग के बढ़ते प्रभाव को दिखाने की उम्मीद है.

भारत-चीन संबंधों में सुधार की उम्मीद  

भारत के लिए यह शिखर सम्मेलन बेहद महत्वपूर्ण है. 2020 के सीमा विवाद के बाद भारत और चीन के बीच तनाव कम करने की कोशिशें चल रही हैं. विश्लेषकों का मानना है कि इस बैठक में दोनों देश सैनिकों की वापसी, व्यापार में रुकावटें हटाने और नए सहयोग के क्षेत्र तलाश सकते हैं. द चाइना-ग्लोबल साउथ प्रोजेक्ट के संपादक एरिक ओलैंडर ने कहा कि भारत पुराने विवादों को भुलाकर चीन के साथ तनाव कम करने पर ध्यान देगा. यह मोदी सरकार की बड़ी प्राथमिकता है. चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग इस शिखर सम्मेलन को अमेरिका के प्रभाव के बाद की नई वैश्विक व्यवस्था दिखाने के लिए इस्तेमाल करेंगे. उन्होंने कहा कि यह सम्मेलन 2001 में एससीओ की स्थापना के बाद सबसे बड़ा होगा. शी ने इसे नए प्रकार के अंतरराष्ट्रीय संबंधों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया. रूस के साथ चीन के संबंधों को उन्होंने सबसे स्थिर और रणनीतिक कहा है.

त्रिपक्षीय वार्ता की संभावना  

नई दिल्ली में रूसी अधिकारियों ने हाल ही में भारत, चीन और रूस के बीच त्रिपक्षीय वार्ता की उम्मीद जताई है. पिछले साल ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में मोदी ने शी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ मंच साझा किया था. इस बार भी ऐसी वार्ताएं हो सकती हैं, जो क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर सहयोग बढ़ा सकती हैं. एससीओ शिखर सम्मेलन भारत के लिए अपनी कूटनीतिक ताकत दिखाने का मौका है. भारत ने 2020 में एससीओ शासनाध्यक्ष परिषद और 2022-23 में राष्ट्राध्यक्ष परिषद की अध्यक्षता की थी. यह बैठक भारत को वैश्विक दक्षिण के देशों के साथ सहयोग बढ़ाने और क्षेत्रीय स्थिरता के लिए काम करने का अवसर देगी.