ट्रंप की 500% टैरिफ धमकी के बीच भारत को मिला यूरोपीय ढाल, पोलैंड बोला- 'हम भारत के साथ हैं'

डोनाल्ड ट्रंप का टैरिफ युद्ध भारत को रूस से दूर कर पाएगा. यह सवाल इस वक्त वैश्विक राजनीति के केंद्र में है. एक तरफ वाशिंगटन से भारत पर 500% तक के दंडात्मक शुल्क लगाने की धमकियां मिल रही हैं.

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नई दिल्ली: डोनाल्ड ट्रंप का टैरिफ युद्ध भारत को रूस से दूर कर पाएगा. यह सवाल इस वक्त वैश्विक राजनीति के केंद्र में है. एक तरफ वाशिंगटन से भारत पर 500% तक के दंडात्मक शुल्क लगाने की धमकियां मिल रही हैं. वहीं दूसरी तरफ यूरोप के एक महत्वपूर्ण देश पोलैंड ने खुलकर भारत का समर्थन कर दिया है. पेरिस में हुई वीमर ट्रायंगल की ऐतिहासिक बैठक में पोलैंड ने स्पष्ट किया कि वह रूस से तेल आयात कम करने के भारत के प्रयासों से संतुष्ट है.

पोलैंड का स्टैंड

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने हाल ही में फ्रांस, जर्मनी और पोलैंड के इस शक्तिशाली समूह में भारत की पहली भागीदारी दर्ज की. बैठक के बाद पोलिश विदेश मंत्री राडोस्लाव सिकोरस्की का बयान नई दिल्ली के लिए किसी बड़ी कूटनीतिक जीत से कम नहीं है.

सिकोरस्की ने कहा, "मैं संतुष्ट हूं कि भारत ने रूसी तेल आयात में कटौती की है, क्योंकि यह पुतिन की युद्ध मशीन को ईंधन दे रहा है." गौरतलब है कि पोलैंड खुद रूस का कड़ा विरोधी रहा है, ऐसे में उसका भारत के रुख का समर्थन करना ट्रंप के दबाव के खिलाफ एक मजबूत 'बफर' का काम कर सकता है.

ट्रंप का '500% टैरिफ' वाला ब्रह्मास्त्र

जनवरी 2026 की शुरुआत भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों के लिए काफी तनावपूर्ण रही है. राष्ट्रपति ट्रंप ने 'रूस प्रतिबंध बिल 2025' को हरी झंडी दे दी है. यह बिल अमेरिका को उन देशों पर 500% तक टैरिफ लगाने की ताकत देता है जो रूसी तेल या यूरेनियम की खरीद जारी रखते हैं.

पीएम मोदी जानते हैं कि मैं खुश नहीं हूंः ट्रंप

ट्रंप ने हाल ही में एयर फोर्स वन पर पत्रकारों से कहा था कि "पीएम मोदी जानते हैं कि मैं खुश नहीं हूं." वर्तमान में, भारतीय सामानों पर पहले से ही 50% तक की ड्यूटी (25% रेसिप्रोकल + 25% रूसी तेल जुर्माना) लग रही है. अब 500% का खतरा भारतीय निर्यातकों की नींद उड़ाने के लिए काफी है.

संतुलन या समझौता?

डाटा बताते हैं कि भारत ने चतुराई से अपनी रणनीति बदली है. जुलाई 2023 में रूस से तेल की दैनिक खरीद जहां 189 मिलियन यूरो थी, वह जनवरी 2026 की शुरुआत में गिरकर 72.9 मिलियन यूरो पर आ गई है. रिलायंस और एचपीसीएल जैसी बड़ी रिफाइनरियों ने भी अमेरिकी प्रतिबंधों के डर से कुछ रूसी शिपमेंट्स रोके हैं. पोलैंड की यह "संतुष्टि" इसी कटौती का नतीजा है.

प्राथमिकता ऊर्जा सुरक्षा

हालांकि, भारत ने हमेशा कहा है कि उसकी प्राथमिकता ऊर्जा सुरक्षा' है. अब देखना यह होगा कि अगले हफ्ते सिकोरस्की की भारत यात्रा के दौरान क्या यूरोप और भारत मिलकर ट्रंप के इस 'टैरिफ प्रेशर' का कोई साझा समाधान निकाल पाते हैं.