'द केरल स्टोरी 2' पर रोक की आशंका, राज्य सरकार की जज ने लगाई फटकार

कुछ दिनों में केरल स्टोरी-2 रिलीज होने वाली थी, लेकिन अब फिल्म पर बैन की तलवार लटक रही है. रिपोर्ट्स के मुताबिक कहा जा रहा है कि फिल्म 17 प्लॉइंट्स बदले जा सकते हैं.

Date Updated Last Updated : 24 February 2026, 02:41 PM IST
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Courtesy: ANI

नई दिल्ली: आगामी फिल्म 'द केरल स्टोरी 2' को लेकर विवाद गहराता जा रहा है. केरल उच्च न्यायालय ने इसके प्रमाणीकरण पर गंभीर सवाल उठाते हुए संकेत दिया है कि फिल्म में राज्य की प्रस्तुति लोगों की भावनाओं को भड़का सकती है और सांप्रदायिक सौहार्द पर असर डाल सकती है. अदालत की इन टिप्पणियों के बाद फिल्म की रिलीज पर अनिश्चितता के बादल मंडराने लगे हैं.

मंगलवार को सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति बेचू कुरियन थॉमस ने फिल्म पर रोक लगाने की मांग वाली तीन याचिकाओं पर विचार किया. याचिकाकर्ताओं का कहना है कि फिल्म जोकि शुक्रवार को रिलीज होने वाली है, केरल की धर्मनिरपेक्ष छवि को गलत ढंग से पेश करती है और धार्मिक तनाव को जन्म दे सकती है. अदालत ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड द्वारा दी गई मंजूरी पर भी सवाल उठाए. साथ ही बता दें कि इस फिल्म के ट्रेलर से केरल के सीएम भी खफा नजर आए. 

फिल्म समाज में दे सकता है गलत संदेश

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति थॉमस ने कहा कि केरल अपनी प्लूरलिस्ट और धर्मनिरपेक्ष पहचान के लिए जाना जाता है. उन्होंने चिंता जताई कि अगर किसी घटना को पूरे राज्य से जोड़कर दिखाया जाए, तो इससे गलत संदेश जा सकता है और सामाजिक भावनाए. भड़क सकती हैं. अदालत ने यह भी रेखांकित किया कि फिल्म का 'सच्ची घटनाओं से प्रेरित' होने का दावा दर्शकों पर गहरा प्रभाव डाल सकता है.

शीर्षक पर उठे सवाल 

अदालत ने फिल्म की सामग्री के साथ ही फिल्म के शीर्षक पर सवाल खड़े किए हैं. न्यायमूर्ति ने शीर्षक में 'केरल' शब्द के इस्तेमाल पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब किसी फिल्म में राज्य का नाम स्पष्ट रूप से जोड़ा जाता है और उसे वास्तविक घटनाओं से प्रेरित बताया जाता है, तो लोगों की आशंकाओं को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. इसके साथ ही फिल्म में से करीब 17 प्लाइंट्स चेंज किए जाएंगे.  

कलात्मक स्वतंत्रता बनाम सामाजिक जिम्मेदारी

न्यायालय ने क्रिएटिव फ्रीडम के महत्व को स्वीकार करते हुए भी यह याद दिलाया कि सीबीएफसी के दिशानिर्देश धार्मिक या नस्लीय समूहों के प्रति आपत्तिजनक सामग्री पर रोक लगाते हैं. अंतरिम व्यवस्था के तहत, निर्माताओं के वकील ने अंतिम निर्णय तक सभी टीज़र हटाने की सहमति दी है. साथ ही, न्यायाधीश के लिए फिल्म की निजी स्क्रीनिंग कराने का प्रस्ताव भी रखा गया है.

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