USA News: अमेरिकी प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर अपने बयान से तहलका मचा दिया है. उन्होंने अपने सोशल प्लॉटफार्म पर पोस्ट किया. इस पोसट में उनका गुस्सा सातवें आसमान पर दिखा. उन्होंनें कहा कि जो भी देश सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के साथ गेम खेलना चाहता है, खासकर वो देश जिन्होंने सालों और दशकों से अमेरिका को धोखा दिया है. उन्हें बहुत ज्यादा टैरिफ देना होगा. उनके साथ उससे भी बुरा होगा, जिससे वे हाल ही में सहमत हुए है. ट्रंप का यह बयान किस देश के लिए हो सकता है, यह सोचने वाली बात है.
बीते 20 फरवरी को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाया था कि ट्रंप ने 1977 के 'इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट' (IEEPA) के तहत व्यापक टैरिफ लगाकर अपने अधिकार क्षेत्र का उल्लंघन किया है. अदालत का तर्क था कि यह कानून राष्ट्रीय सुरक्षा आपात स्थितियों के लिए है, न कि सामान्य व्यापार नीति के लिए.
ट्रंप ने गुस्से में पोस्ट करते हुए कहा, "कोई भी देश जो सुप्रीम कोर्ट के इस अजीब फैसले के साथ “गेम खेलना” चाहता है, खासकर वो देश जिन्होंने सालों, और दशकों तक U.S.A. को “धोखा” दिया है, उन्हें बहुत ज़्यादा टैरिफ़ देना होगा, और उससे भी बुरा, जिस पर वे हाल ही में सहमत हुए हैं."
PRESIDENT TRUMP:
— The Kobeissi Letter (@KobeissiLetter) February 23, 2026
"Any Country that wants to 'play games' with the ridiculous Supreme Court decision will be met with a much higher Tariff." pic.twitter.com/8zwKCkSRuM
अदालती झटके के बावजूद ट्रंप पीछे हटने को तैयार नहीं हैं. व्हाइट हाउस ने फैसले के कुछ ही घंटों के भीतर 'व्यापार अधिनियम 1974' की धारा 122 (Section 122) के तहत एक संशोधित योजना पेश कर दी. ट्रंप ने मंगलवार सुबह से प्रभावी होने वाले 15 प्रतिशत विश्वव्यापी टैरिफ दर पर हस्ताक्षर कर दिए हैं. यह कानून प्रशासन को कांग्रेस की मंजूरी के बिना लगभग पांच महीनों तक अस्थायी आयात कर लगाने की अनुमति देता है. ट्रंप का तर्क है कि अब वे कानूनी निश्चितता के साथ लाइसेंसिंग और अन्य टैरिफ उपकरणों का उपयोग "बहुत अधिक शक्तिशाली और आक्रामक तरीके से" कर सकते हैं.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन में, अमेरिकी सीमा शुल्क और सीमा सुरक्षा (CBP) ने एक बयान जारी कर कहा है कि 1977 के IEEPA कानून के तहत टैरिफ की वसूली मंगलवार स्थानीय समयानुसार रात 12:01 बजे से बंद कर दी जाएगी. हालांकि, ट्रंप द्वारा नए कानून के तहत लगाए गए 15% टैरिफ ने अब अंतरराष्ट्रीय बाजारों और व्यापारिक सहयोगियों के बीच बेचैनी बढ़ा दी है. फिलहाल राष्ट्रपति और न्यायपालिका के बीच यह टकराव अमेरिकी लोकतंत्र के लिए एक नया मोड़ साबित हो रहा है.