नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर अपने बयान और सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर चर्चा में हैं. इस बार मामला ग्रीनलैंड से जुड़ा है, जिसे लेकर ट्रंप ने ऐसी तस्वीर साझा की कि दुनियाभर में राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई. तस्वीर में ट्रंप आसमान से ग्रीनलैंड की ओर देखते नजर आ रहे हैं और उसके साथ लिखा था, “Hello, Greenland!” खास बात यह है कि अब ग्रीनलैंड को ईरान और होर्मुज स्ट्रेट संकट के बीच तेल आपूर्ति के विकल्प के रूप में भी पेश किया जा रहा है.
डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को सोशल मीडिया पर अपनी एक अनोखी तस्वीर शेयर की. तस्वीर में वह ग्रीनलैंड को ऊपर से देखते दिखाई दे रहे थे. पोस्ट के साथ उन्होंने छोटा सा संदेश लिखा-“Hello, Greenland!” ट्रंप की इस पोस्ट को कई लोगों ने मजाकिया अंदाज माना, जबकि राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह अमेरिका की रणनीतिक सोच का संकेत भी हो सकता है. दरअसल, ट्रंप पहले भी कई बार ग्रीनलैंड को लेकर अपनी दिलचस्पी जाहिर कर चुके हैं.
हाल ही में अमेरिका के विशेष दूत और लुइसियाना के अटॉर्नी जनरल जेफ लेनडरी ने ग्रीनलैंड का दौरा किया. इस दौरान उन्होंने वहां के राजनीतिक नेताओं और कारोबारी प्रतिनिधियों से मुलाकात की. लेनडरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि बातचीत के दौरान सुरक्षा, आर्थिक विकास और आर्कटिक क्षेत्र में अमेरिका-ग्रीनलैंड सहयोग जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई. उन्होंने कहा कि आने वाले महीनों में अमेरिका ग्रीनलैंड के साथ अपने रिश्तों को और मजबूत करना चाहता है.
अमेरिका की बढ़ती सक्रियता को लेकर ग्रीनलैंड में विरोध के स्वर भी तेज हो गए हैं. न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, राजधानी नूक में सैकड़ों लोगों ने नए अमेरिकी वाणिज्य दूतावास भवन के खिलाफ प्रदर्शन किया. प्रदर्शनकारियों के हाथों में ऐसे पोस्टर थे जिन पर लिखा था- “हम आपका पैसा नहीं चाहते” और “ग्रीनलैंड के लोग MAGA ट्रोजन हॉर्स को पहचानते हैं.” कई लोग सड़कों पर “Go Away!” के नारे लगाते भी नजर आए. स्थानीय लोगों का आरोप है कि अमेरिका आर्थिक मदद और सुरक्षा सहयोग के नाम पर धीरे-धीरे ग्रीनलैंड में अपना प्रभाव बढ़ाने की कोशिश कर रहा है.
ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप की दिलचस्पी नई नहीं है. अपने पहले राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान भी उन्होंने ग्रीनलैंड को खरीदने की इच्छा जाहिर की थी. उस समय यह बयान दुनियाभर में चर्चा का विषय बन गया था और डेनमार्क समेत कई देशों ने इसका विरोध किया था. हालांकि ट्रंप लगातार कहते रहे हैं कि ग्रीनलैंड रणनीतिक रूप से अमेरिका के लिए बेहद अहम इलाका है.
अब पश्चिम एशिया में तनाव और होर्मुज स्ट्रेट संकट के बीच ग्रीनलैंड को ऊर्जा आपूर्ति के नए विकल्प के तौर पर पेश किया जा रहा है. अमेरिकी दूत जेफ लेनडरी ने दावा किया कि ग्रीनलैंड हर दिन करीब 20 लाख बैरल तेल उत्पादन करने की क्षमता रखता है. उन्होंने कहा कि अगर ऐसा होता है तो होर्मुज स्ट्रेट पर दुनिया की निर्भरता काफी कम हो सकती है. लेनडरी के मुताबिक, तेज गति से काम किया जाए तो अगले 10 महीनों के भीतर वहां तेल उत्पादन शुरू किया जा सकता है.
आर्कटिक क्षेत्र में रूस, चीन और अमेरिका के बीच बढ़ती रणनीतिक प्रतिस्पर्धा ने ग्रीनलैंड की अहमियत को और बढ़ा दिया है. यह इलाका प्राकृतिक संसाधनों, दुर्लभ खनिजों, तेल भंडार और समुद्री मार्गों के कारण वैश्विक ताकतों के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में आर्कटिक क्षेत्र दुनिया की राजनीति और अर्थव्यवस्था का बड़ा केंद्र बन सकता है.