नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव के बीच दोनों देशों ने बातचीत में कुछ प्रगति के संकेत दिए हैं, लेकिन तेहरान के यूरेनियम भंडार और रणनीतिक रूप से बेहद अहम होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर अब भी बड़ा गतिरोध बना हुआ है. इन मुद्दों पर सहमति नहीं बनने से क्षेत्र में बड़े संघर्ष की आशंका लगातार बनी हुई है.
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ताजा बातचीत के दौर के बाद कहा कि चर्चाओं में कुछ अच्छे संकेत देखने को मिले हैं, हालांकि उन्होंने किसी जल्द नतीजे को लेकर सतर्क रहने की बात कही. वहीं, मीडिया से बात करते हुए एक वरिष्ठ ईरानी सूत्र ने बताया कि अभी तक कोई समझौता नहीं हुआ है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच मतभेद पहले की तुलना में कुछ कम हुए हैं. रूबियो ने कहा, कुछ अच्छे संकेत मिल रहे हैं. मैं बहुत ज्यादा आशावादी नहीं होना चाहता. तो चलिए देखते हैं कि अगले कुछ दिनों में क्या होता है.
अमेरिका और ईरान के बीच सबसे बड़ा विवाद ईरान के समृद्ध यूरेनियम भंडार और होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण को लेकर है. ईरान अपनी परमाणु सामग्री पर नियंत्रण बनाए रखना चाहता है, जबकि होर्मुज में जहाजों की आवाजाही से जुड़े नियमों पर भी अपनी पकड़ छोड़ने के मूड में नहीं है. यह जलमार्ग दुनिया के तेल और गैस व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस मुद्दे पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि अमेरिका ईरान के उच्च स्तर तक समृद्ध यूरेनियम भंडार को अपने कब्जे में लेगा. ट्रंप ने कहा, हम इसे हासिल कर लेंगे. हमें इसकी जरूरत नहीं है, हम इसे नहीं चाहते. शायद हम इसे हासिल करने के बाद नष्ट कर देंगे, लेकिन हम उन्हें इसे लेने नहीं देंगे.
ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों से शुल्क वसूलने या किसी तरह की पाबंदी लगाने के ईरानी संकेतों का भी विरोध किया. उन्होंने कहा कि यह एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है और इसे पूरी तरह खुला और स्वतंत्र रहना चाहिए. उन्होंने कहा, हम इसे खुला और मुफ्त चाहते हैं. हम टोल नहीं चाहते. इसके साथ ही ट्रंप ने दोहराया, यह एक अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग है. दूसरी ओर, तेहरान लगातार यह दावा कर रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है. ईरानी अधिकारियों ने संकेत दिए हैं कि यूरेनियम के मुद्दे पर किसी तरह का समझौता फिलहाल संभव नहीं दिखता. वरिष्ठ सूत्रों के मुताबिक, ईरान के सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने समृद्ध यूरेनियम को देश से बाहर भेजने पर रोक लगाने का निर्देश दिया है.
ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी संप्रभुता का दावा भी दोहराया है. ईरान के उप विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका, इजराइल और उनके सहयोगियों की हालिया सैन्य गतिविधियों ने क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति बदल दी है, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत ईरान को अपने समुद्री हितों की रक्षा के लिए व्यावहारिक और आनुपातिक उपाय अपनाने का अधिकार है.
इस तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी दिखाई दे रहा है. अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने चेतावनी दी है कि मौजूदा हालात दुनिया के सबसे बड़े ऊर्जा संकटों में से एक का रूप ले सकते हैं. एजेंसी ने कहा कि जुलाई और अगस्त में बढ़ती मांग के दौरान ईंधन बाजार रेड जोन में पहुंच सकता है.
हालांकि कुछ व्यावसायिक जहाज अब भी होर्मुज से गुजर रहे हैं, लेकिन समुद्री यातायात पहले की तुलना में काफी कम बना हुआ है. ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार, पिछले 24 घंटे में केवल 31 जहाजों ने इस जलमार्ग को पार किया, जबकि संघर्ष बढ़ने से पहले यहां रोजाना 125 से अधिक जहाज गुजरते थे.
इस बीच बैकचैनल कूटनीति के जरिए बातचीत आगे बढ़ाने की कोशिशें भी जारी हैं. आसिम मुनीर के तेहरान दौरे पर जाने की संभावना जताई जा रही है. बातचीत से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, वॉशिंगटन और तेहरान के बीच संवाद को तेज करने की कोशिश हो रही है, क्योंकि ट्रंप की नाराजगी बढ़ने की आशंका बनी हुई है.
सूत्रों के अनुसार हम ईरान के सभी विभिन्न समूहों से संवाद सुव्यवस्थित करने और प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए बातचीत कर रहे हैं. ट्रंप का धैर्य कम होता जा रहा है, यह चिंता का विषय है, लेकिन हम दोनों पक्षों से संदेशों के आदान-प्रदान की गति को नियंत्रित करने के लिए काम कर रहे हैं.
ईरान ने इस सप्ताह अमेरिका के सामने एक नया प्रस्ताव भी रखा है, हालांकि बताया जा रहा है कि इसकी शर्तें पहले की मांगों से ज्यादा अलग नहीं हैं. प्रस्ताव में होर्मुज पर ईरान का नियंत्रण, युद्ध से हुए नुकसान का मुआवजा, प्रतिबंधों में राहत, जब्त ईरानी संपत्तियों की वापसी और क्षेत्र से अमेरिकी सैनिकों की वापसी जैसी मांगें शामिल हैं.
ट्रंप पहले ही चेतावनी दे चुके हैं कि यदि बातचीत से सही जवाब नहीं मिले तो अमेरिका दोबारा सैन्य कार्रवाई कर सकता है. वहीं, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने कहा है कि किसी भी नए हमले का जवाब क्षेत्र से बाहर तक दिया जाएगा. कई दौर की बातचीत और नाजुक युद्धविराम के बावजूद ईरान अब भी अपने लगभग हथियार स्तर तक समृद्ध यूरेनियम भंडार, मिसाइल और ड्रोन क्षमता को बनाए हुए है, जिसे अमेरिका और उसके सहयोगी लगातार बड़ा खतरा मान रहे हैं.