नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 को लेकर उठे पेपर लीक विवाद ने शिक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. इस बीच राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) के महानिदेशक अभिषेक सिंह ने बड़ा बयान दिया है. उन्होंने दावा किया कि प्रश्नपत्र एजेंसी के सिस्टम से लीक नहीं हुआ था और पूरे मामले की जांच फिलहाल केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) कर रही है.
बता दें कि शिक्षा, महिला, बाल, युवा और खेल मामलों से जुड़ी संसदीय स्थायी समिति ने इस मामले पर चर्चा के लिए शिक्षा मंत्रालय और NTA के वरिष्ठ अधिकारियों को तलब किया था. बैठक में शिक्षा सचिव विनीत जोशी, NTA अध्यक्ष प्रदीप कुमार जोशी और महानिदेशक अभिषेक सिंह मौजूद रहे.
बैठक के दौरान सांसदों ने पूछा कि जब परीक्षा देशभर में इतने बड़े स्तर पर आयोजित होती है, तो पेपर लीक जैसी घटनाएं कैसे हो जाती हैं. इसके जवाब में अभिषेक सिंह ने कहा कि प्रश्नपत्र NTA के सिस्टम से बाहर नहीं गया था और एजेंसी की तरफ से सुरक्षा में कोई चूक नहीं हुई. उन्होंने यह भी कहा कि मामले की जांच CBI कर रही है और एजेंसी जांच में पूरा सहयोग दे रही है.
बैठक के दौरान कुछ विपक्षी सांसदों ने मांग की कि CBI जांच की स्थिति और रिपोर्ट समिति के सामने रखी जाए. हालांकि भाजपा के कुछ सांसदों ने इसका विरोध किया. उनका कहना था कि CBI एक स्वतंत्र एजेंसी है और उसे बिना किसी दबाव के जांच पूरी करने का समय दिया जाना चाहिए. इस दौरान NTA अधिकारियों ने एजेंसी में सुधार और परीक्षा प्रणाली को मजबूत बनाने के लिए तैयार की गई राधाकृष्णन रिपोर्ट में की गई सिफारिशों पर भी बात की.
NTA महानिदेशक अभिषेक सिंह ने कहा कि राधाकृष्णन समिति द्वारा दिए गए अल्पकालिक सुधारों में से करीब 70 प्रतिशत सुझाव पहले ही लागू किए जा चुके हैं. अधिकारियों ने बताया कि एजेंसी अब परीक्षा प्रक्रिया को और ज्यादा सुरक्षित और पारदर्शी बनाने पर काम कर रही है. इसके लिए पेपर तैयार करने, सुरक्षित रखने और वितरण की प्रक्रिया में केवल विश्वसनीय लोगों को शामिल करने की योजना बनाई जा रही है. साथ ही NTA अब NEET जैसी परीक्षाओं को कंप्यूटर आधारित परीक्षा यानी CBT मोड में आयोजित करने की संभावना पर भी विचार कर रहा है.
बैठक में सांसदों ने NTA में कर्मचारियों की कमी का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि एजेंसी में खाली पदों को जल्द भरना जरूरी है ताकि परीक्षा संचालन में किसी तरह की गड़बड़ी न हो. NTA अधिकारियों ने समिति को बताया कि फिलहाल एजेंसी में लगभग 25 प्रतिशत स्टाफ की कमी है. हालांकि रिक्त पदों को भरने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है.
राधाकृष्णन समिति ने परीक्षा प्रणाली में बड़े बदलावों की सिफारिश की है. समिति ने स्नातक प्रवेश परीक्षाओं के लिए एकीकृत ढांचा तैयार करने और धीरे-धीरे पारंपरिक पेन-पेपर परीक्षा से कंप्यूटर आधारित परीक्षा की ओर बढ़ने का सुझाव दिया है. इसके अलावा बहु-स्तरीय और बहु-सत्रीय परीक्षाएं आयोजित करने, आयु सीमा और प्रयासों की संख्या तय करने जैसे सुझाव भी दिए गए हैं. समिति ने आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने पर भी जोर दिया है. इसके तहत क्लाउड आधारित डिजिटल सिस्टम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ब्लॉकचेन और रियल टाइम मॉनिटरिंग जैसी तकनीकों को परीक्षा प्रक्रिया में शामिल करने की योजना बनाई जा रही है.
यह विवाद तब सामने आया जब सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स पर एक कथित “अनुमानित प्रश्नपत्र” वायरल हुआ. जांच में सामने आया कि इस कथित पेपर के कई सवाल असली परीक्षा के प्रश्नों से मिलते-जुलते थे. शुरुआत में NTA ने इन खबरों को अफवाह बताया था, लेकिन बाद में कई राज्यों की पुलिस और केंद्रीय एजेंसियों ने जांच शुरू कर दी.
जांच एजेंसियों को शक है कि राजस्थान, महाराष्ट्र, हरियाणा, बिहार और केरल में कोचिंग सेंटरों और बिचौलियों के जरिए पेपर फैलाया गया था. 12 मई को NTA ने आधिकारिक तौर पर 3 मई को हुई NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द कर दी थी. एजेंसी ने माना कि परीक्षा की निष्पक्षता प्रभावित हुई है. इसके बाद केंद्र सरकार ने जांच CBI को सौंप दी और दोबारा परीक्षा 21 जून को कराने की घोषणा की गई.
CBI इस मामले में अब तक नौ लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है. गिरफ्तार आरोपियों में राजस्थान, हरियाणा और महाराष्ट्र के कई लोग शामिल हैं. जांच के दौरान पुणे से रसायन विज्ञान के लेक्चरर पी.वी. कुलकर्णी और वनस्पति विज्ञान की शिक्षिका मनीषा गुरुनाथ मंधारे की गिरफ्तारी को बड़ी सफलता माना जा रहा है. एजेंसियां अब पूरे नेटवर्क की जांच कर रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि पेपर लीक का दायरा कितना बड़ा था.