'ग्रीनलैंड पर हमले की तैयारी...' बढ़ा अमेरिका–ग्रीनलैंड विवाद, ट्रंप के बयान से बढ़ा तनाव, US आर्मी हुई खिलाफ

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के बाद अब ग्रीनलैंड को लेकर सेना से संभावित सैन्य कार्रवाई की योजना तैयार करने को कहा है. बताया जा रहा है कि ट्रंप ने स्पेशल फोर्स कमांडरों से इस विषय पर प्लान बनाने को कहा है.

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नई दिल्ली: अमेरिका और ग्रीनलैंड के बीच तनाव एक बार फिर से तेज हो गई है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वेनेजुएला के बाद अब ग्रीनलैंड को लेकर सेना से संभावित सैन्य कार्रवाई की योजना तैयार करने को कहा है. बताया जा रहा है कि ट्रंप ने स्पेशल फोर्स कमांडरों से इस विषय पर प्लान बनाने को कहा है. हालांकि खबर है कि  अमेरिकी सेना के शीर्ष अधिकारी इस विचार से फिलहाल सहमत नहीं हैं.

ट्रंप की सोच और सलाहकारों की भूमिका 

सूत्रों के अनुसार, ट्रंप के कुछ करीबी राजनीतिक सलाहकार इस योजना को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं. इनमें स्टीफन मिलर का नाम प्रमुख तौर से सामने आ रहा है. इन सलाहकारों का मानना है कि अमेरिका को जल्दी कदम उठाना चाहिए, ताकि रूस या चीन ग्रीनलैंड में अपनी पकड़ मजबूत न कर सकें. 

हालांकि कई राजनयिकों का कहना है कि इसके पीछे केवल रणनीतिक वजह ही नहीं, बल्कि घरेलू राजनीति भी एक बड़ा कारण हो सकती है. अमेरिका में जल्द ही मध्यावधि चुनाव होने हैं और अर्थव्यवस्था को लेकर सरकार पर सवाल उठ रहे हैं. ऐसे में माना जा रहा है कि ट्रंप जनता का ध्यान आर्थिक मुद्दों से हटाकर राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे बड़े विषय पर ले जाना चाहते हैं. ताकी जनता सरकार पर सवाल नहीं उठा सके. 

सेना ने क्यों किया विरोध?

मिली जानकारी के अनुसार, ट्रंप ने जॉइंट स्पेशल ऑपरेशंस कमांड (JSOC) से ग्रीनलैंड को लेकर सैन्य योजना बनाने को कहा, लेकिन जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ ने इसका विरोध किया है. सैन्य अधिकारियों का मानना है कि ये अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ होगा और अमेरिकी कांग्रेस भी इसे मंजूरी नहीं देगी. हालांकि ट्रंप अपनी जिद्द पर अडिग हैं.

एक सूत्र के अनुसार, सेना के अधिकारी ट्रंप का ध्यान दूसरी सुरक्षा चुनौतियों की ओर मोड़ने की कोशिश कर रहे हैं, जैसे रूस के कथित “घोस्ट जहाजों” पर कार्रवाई या ईरान के खिलाफ सीमित कदम.

नाटो के लिए क्यों खतरनाक है यह मुद्दा?

अगर अमेरिका ग्रीनलैंड को लेकर कोई सख्त कदम उठाता है, तो इसका असर केवल डेनमार्क या ग्रीनलैंड तक सीमित नहीं रहेगा. इससे ब्रिटेन समेत कई नाटो देशों के साथ अमेरिका के रिश्ते खराब हो सकते हैं. कुछ राजनयिक दस्तावेजों में तो इसे नाटो के भीतर टूटने का खतरा भी बताया गया है.

ट्रंप ने दी चेतावनी

ट्रंप ने हाल ही में फिर चेतावनी दी कि अगर अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर नियंत्रण नहीं किया, तो भविष्य में रूस या चीन वहां कब्जा कर सकते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि अगर बातचीत से बात नहीं बनी, तो अमेरिका को कड़ा कदम उठाना पड़ सकता है.

वहीं, ग्रीनलैंड के सभी प्रमुख राजनीतिक दलों ने एकजुट होकर साफ कहा है कि वे अमेरिका का हिस्सा बनना चाहते हैं. ग्रीनलैंड का भविष्य वहां की जनता खुद तय करेगी.