नई दिल्ली: टी20 विश्व कप धीरे-धीरे अपने अंतिम पड़ाव की ओर अग्रसर है. लेकिन इसमें टीम इंडिया कहीं पिछड़ सी गई है. टीम इंडिया के टी20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल में पहुंचने की संभावना अब काफी कम हो गई है. सुपर 8 के पहले मुकाबले में साउथ अफ्रीका से मिली 76 रनों की बड़ी हार के बाद अब भारत का सेमीफाइनल में पहुंचना मुश्किल नजर आ रहा है. इस हार का असर भारत के नेट रनरेट पर पड़ा है जिस कारण टीम अब अंक तालिका में तीसरे पायदान पर है.
हालांकि अब भी टीम के सेमीफाइनल में पहुंचने कुछ उम्मीद है. अगर भारत अपने बचे हुए दोनो मुकाबले जीत लें तो टीम सेमीफाइनल में पहुंच सकती है. लेकिन इसी बीच कुछ ऐसा दुर्लभ संयोग भी बन रहा है जिसे देख फैंस काफी खुश हैं. इसे देखकर ऐसा कहा जा सकता है कि डिफेंडिंग चैंपियन एक दोबारा खिताब अपने नाम कर सकती है. ऐसे ही कुछ समीकरण 2007 टी20 वर्ल्ड कप में बने थे, जब महेंद्र सिंह धोनी की कप्तानी में भारत ने पहली बार ये खिताब अपने नाम किया था.
बता दें 2007 टी20 वर्ल्ड कप में भारत ने ग्रुप स्टेज में पाकिस्तान को धराशाही किया था. वहीं सुपर 8 मुकाबले में भारत को पहले न्यूजीलैंड का सामना करना था. ग्रुप स्टेज में शादनार प्रदर्शन करने वाली टीम सुपर 8 के पहले ही मैच में 10 विकेट से मैच हार बैठी. जिसके बाद टीम का सेमीफाइनल पहुचंना मुश्किल लग रहा था.
हालांकि बाद में भारत ने इंग्लैंड और साउथ अफ्रीका को करारी शिकस्त देकर सेमीफाइनल में अपनी जगह बनाई थी. इसके बाद सेमीफाइल में भी भारत ने ऑस्ट्रेलिया की कुटाई करके फाइनल में अपनी जगह पक्की की. न केवल जगह पक्की की बल्कि टीम ने अपने टी20 विश्व कप संस्करण की पहली ट्रॉफी अपने नाम की थी.
अब अगर दूसरे दुर्लभ संयोग की बात करें तो साल 2007 में भी जिम्बाब्वे ने ग्रुप स्टेज में ऑस्ट्रेलिया को हराया था. इस साल भी जिम्बाब्वे ने कुछ वैसा ही कारनामा दोहराया है. इस साल भी जिम्बाब्वे ने ग्रुप स्टेज में विश्व चैंपियन ऑस्ट्रेलिया को हराया है. इसके अलावा टी20 विश्व कप के पहले संस्करण में भी भारत सुपर 8 में अपना पहला मुकाबाला हारा था. हालांकि बाद में टीम ने लगातार 4 जीत दर्ज की थी. इन सारें संयोग को देखते हुए फैंस में एक अलग उत्साह देखने को मिल रहा है. फैंस मान रहे हैं इन संयोगों के साथ जैसे भारत तब जीता था वैसे ही टीम अभी भी जीतेगी.