नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से ग्रीनलैंड को लेकर एक बड़ा बयान दिया है, जिस कारण एक बार फिर से ट्रंप चर्चा में बने हुए है. वह वेनेजुएला पर हुई कार्रवाई को लेकर पहले से ही चर्चा में बने हुए हैं.
ट्रंप ने ग्रीनलैंड को लेकर चेतावनी देते हुए कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका इस आर्कटिक द्वीप पर “कार्रवाई” कर सकता है. ट्रम्प का कहना है कि अगर अमेरिका ने ऐसा नहीं किया, तो रूस या चीन वहां अपना प्रभाव बढ़ा सकते हैं, जो अमेरिका के लिए खतरा होगा.
शनिवार को व्हाइट हाउस में एक कार्यक्रम के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका ग्रीनलैंड के मामले में या तो 'आसान तरीका' अपनाएगा या फिर 'कठिन तरीका'. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि चाहे ग्रीनलैंड के लोग चाहें या न चाहें, अमेरिका को कुछ न कुछ करना ही पड़ेगा.
#WATCH | US President Donald Trump says, "We are going to do something on Greenland, whether they like it or not, because if we don't do it, Russia or China will take over Greenland, and we're not going to have Russia or China as a neighbour. I would like to make a deal the easy… pic.twitter.com/lclIgq5JZa
— ANI (@ANI) January 9, 2026
ट्रम्प ने ग्रीनलैंड के रणनीतिक महत्व पर जोर देते हुए कहा कि यह क्षेत्र सुरक्षा के लिहाज से बहुत अहम है. उनका कहना था कि अगर अमेरिका ग्रीनलैंड की रक्षा नहीं करता, तो रूस या चीन वहां कदम बढ़ा सकते हैं. ट्रम्प ने यह भी कहा कि देशों के पास अपने क्षेत्र की सुरक्षा और स्वामित्व का अधिकार होना चाहिए.
ग्रीनलैंडवासियों को मिलेंगे 6 अरब डॉलर
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ट्रम्प प्रशासन ग्रीनलैंड के लोगों को अमेरिका के साथ करीबी संबंध बनाने के लिए सीधे नकद भुगतान देने पर भी विचार कर रहा है. बताया जा रहा है कि प्रति व्यक्ति 10,000 से लेकर 100,000 डॉलर तक की एकमुश्त राशि देने पर चर्चा हुई है. अगर यह योजना लागू होती है, तो कुल खर्च करीब 6 अरब डॉलर तक हो सकता है.
ग्रीनलैंड लगभग 57,000 लोगों की आबादी वाला एक अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है, जो डेनमार्क के अधीन आता है और यह प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है. डेनमार्क ने अमेरिका की संभावित कार्रवाई पर चिंता जताई है.
डेनिश अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर ग्रीनलैंड पर हमला हुआ, तो उनके सैनिक पहले कार्रवाई करेंगे और बाद में सवाल पूछेंगे. यूरोप के कई देशों ने भी आर्कटिक क्षेत्र में अमेरिका द्वारा खुले तौर पर सैन्य कार्रवाई की बात करने पर चिंता जताई है.