नई दिल्ली: वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की नाटकीय गिरफ्तारी के बाद अब अमेरिका और रूस के बीच समंदर में ठन गई है. अमेरिकी कोस्ट गार्ड और सेना ने एक साहसिक मिड-सी ऑपरेशन को अंजाम देते हुए रूसी झंडे वाले तेल टैंकर मरीनेरा को उत्तरी अटलांटिक में जब्त कर लिया है. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि इस टैंकर पर सवार 28 क्रू सदस्यों में 3 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं, जिससे अब भारत सरकार की चिंताएं बढ़ गई हैं.
अमेरिकी होमलैंड सिक्योरिटी सेक्रेटरी क्रिस्टी नोएम के अनुसार, यह जहाज हफ्तों से अमेरिकी समुद्री नाकाबंदी को चकमा दे रहा था. पकड़े जाने से बचने के लिए टैंकर ने अपना झंडा बदलकर गुयाना का कर लिया और जहाज पर अपना नाम बदलकर मरीनेरा पेंट कर दिया, लेकिन अमेरिकी कोस्ट गार्ड जहाज USCGC मुनरो ने खतरनाक तूफानों और खुले समंदर में इसका पीछा किया. हेलिकॉप्टर की मदद से अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज टैंकर पर चढ़ीं और इसे अपने नियंत्रण में ले लिया.
रिपोर्ट के अनुसार, इस टैंकर पर एक अंतरराष्ट्रीय क्रू सवार था. इसमें 17 यूक्रेनी, 6 जॉर्जियाई, 3 भारतीय और 2 रूसी नागरिक शामिल हैं. वेनेजुएला और रूस से जुड़े होने के कारण अमेरिका ने इसे घोस्ट फ्लीट का हिस्सा बताया है. ब्रिटेन ने भी इस ऑपरेशन में अमेरिका को बेसिंग और लॉजिस्टिक सपोर्ट प्रदान किया है.
जहां अमेरिका इसे अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और प्रतिबंधों का पालन सुनिश्चित करने की कार्रवाई बता रहा है, वहीं रूस ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया दी है. रूसी सांसद आंद्रेई क्लिशस ने इसे सरासर समुद्री डकैती करार दिया है. रूस के परिवहन मंत्रालय का कहना है कि अमेरिकी नौसेना के जहाज पर चढ़ने के बाद से उनका अपने क्रू से संपर्क टूट गया है.
यह घटना भारत के लिए कूटनीतिक सिरदर्द बन सकती है. एक तरफ भारत के तीन नागरिक अमेरिकी हिरासत में हैं, वहीं दूसरी तरफ टैंकर का रूस और वेनेजुएला कनेक्शन मामले को पेचीदा बनाता है. विदेश मंत्रालय (MEA) की ओर से अभी इस पर आधिकारिक बयान आना बाकी है, लेकिन प्राथमिकता इन भारतीयों की सुरक्षित रिहाई सुनिश्चित करना होगा.