गंगा पानी विवाद पर बांग्लादेश की नई चाल, UN में ‘गारंटी क्लॉज’ का दबाव

भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा के पानी का पुराना मुद्दा फिर गरमा गया है। 1996 की गंगा जल संधि दिसंबर 2026 में खत्म हो रही है और उससे पहले ही ढाका ने नई संधि के लिए सख्त रुख अपना लिया है।

Date Updated Last Updated : 19 August 2026, 06:40 PM IST
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Courtesy: AI generated

नई दिल्ली: भारत और बांग्लादेश के बीच गंगा के पानी का पुराना मुद्दा फिर गरमा गया है। 1996 की गंगा जल संधि दिसंबर 2026 में खत्म हो रही है और उससे पहले ही ढाका ने नई संधि के लिए सख्त रुख अपना लिया है। बांग्लादेश अब नई डील में "गारंटी क्लॉज" जोड़वाना चाहता है ताकि सूखे के मौसम में भी उसे पानी मिलता रहे।  

क्या है बांग्लादेश की मांग?   

बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री शाहिदुद्दीन चौधरी अनी ने मंगलवार को ढाका में एक सेमिनार में कहा कि नई संधि में पानी की भरोसेमंद सप्लाई का प्रावधान होना चाहिए। उन्होंने कहा, "हमें एक समझौते पर हस्ताक्षर करने ही होंगे। बिना समझौते के हम आगे नहीं बढ़ सकते। यह हमारा अधिकार है।"  

अनी ने बताया कि ढाका चाहता है कि नए समझौते में "सूचना के अधिकार" और "गारंटी क्लॉज" को शामिल किया जाए। गारंटी क्लॉज का मतलब है कि नदी के निचले इलाके वाले देश को कम से कम तय मात्रा में पानी मिले, खासकर जब बहाव कम हो जाए। ये क्लॉज 1977 की संधि में था, लेकिन 1996 की डील में इसे हटा दिया गया था।  

मंत्री ने संकेत दिया कि अगर बातचीत से हल नहीं निकला तो बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय मंचों का रुख करेगा। उन्हें उम्मीद है कि अगले महीने UN में प्रधानमंत्री तारिक रहमान इस मुद्दे को मजबूती से उठाएंगे।  

1996 की गंगा संधि में क्या था?   

12 दिसंबर 1996 को तत्कालीन PM एच.डी. देवगौड़ा और बांग्लादेश की PM शेख हसीना ने "गंगा वाटर्स शेयरिंग ट्रीटी" पर साइन किए थे। ये समझौता 30 साल के लिए था और दिसंबर 2026 में इसकी मियाद खत्म हो रही है।  

इस संधि का मकसद फरक्का बैराज पर उपलब्ध गंगा के पानी को लीन सीजन यानी 1 जनवरी से 31 मई के बीच दोनों देशों में बांटना था। ये पूरे साल के पानी के बंटवारे का समझौता नहीं है।  

फरक्का के बाद गंगा की दो धाराएं   

गंगा उत्तराखंड से निकलकर UP, बिहार और बंगाल से होते हुए फरक्का पहुंचती है। यहां से इसकी धारा दो हिस्सों में बंट जाती है। एक धारा भागीरथी-हुगली बनकर कोलकाता होते हुए बंगाल की खाड़ी में जाती है। दूसरी धारा पूर्व की ओर मुड़कर बांग्लादेश में प्रवेश करती है। बांग्लादेश में इसे पद्मा कहा जाता है।  

क्यों बढ़ी है बांग्लादेश की चिंता?  

बांग्लादेश का कहना है कि 1996 में जिन हाइड्रोलॉजिकल आंकड़ों के आधार पर संधि हुई थी, आज हालात बदल गए हैं। जलवायु परिवर्तन, अनियमित बारिश और सूखे की वजह से नदी के प्रवाह में अनिश्चितता बढ़ गई है।  

इसलिए ढाका अब ऐसी व्यवस्था चाहता है जिससे सूखे के समय उसकी पानी की जरूरतें सुरक्षित रहें। बांग्लादेश ने उम्मीद जताई है कि भारत उसके लोगों के अधिकारों और भावनाओं का सम्मान करेगा। अब देखना होगा कि दिसंबर 2026 से पहले दोनों देश नई संधि पर कैसे सहमति बनाते हैं।  

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