नई दिल्ली: ईरान के साथ बढ़ते तनाव के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का गुस्सा अब उसके पड़ोसी देश ओमान की ओर भी मुड़ता दिखाई दे रहा है. ट्रंप ने इस हफ्ते फॉक्स न्यूज के रिपोर्टर ट्रे यिंगस्ट से बातचीत में कहा कि अगर ओमान अमेरिका के रास्ते में आया तो उस पर बमबारी की जा सकती है. इस दौरान उन्होंने एक आपत्तिजनक शब्द का भी इस्तेमाल किया. ट्रंप के इस बयान के बाद खाड़ी क्षेत्र में तनाव को लेकर नई चिंता पैदा हो गई है, हालांकि ओमान की सरकार ने अब तक इस पर कोई सार्वजनिक प्रतिक्रिया नहीं दी है.
दरअसल, ट्रंप की नाराजगी की बड़ी वजह ओमान और ईरान के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर चल रही बातचीत बताई जा रही है. दो क्षेत्रीय अधिकारियों के मुताबिक, दोनों देश इस अहम समुद्री रास्ते से जुड़े एक समझौते के काफी करीब पहुंच चुके हैं. यही संभावित डील अब अमेरिका के लिए चिंता का कारण बनती दिख रही है.
ट्रंप प्रशासन पहले से ही ईरान के मुद्दे पर दबाव में है. ट्रंप ने शुरुआत में छोटी अवधि के संघर्ष और कमजोर ईरान की बात कही थी. साथ ही उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बेहतर समझौता करने का भरोसा भी जताया था. लेकिन हालात उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़े. अब ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को अपनी बातचीत की रणनीति का अहम हिस्सा बना लिया है. यह समुद्री मार्ग अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. पहले इसे सभी देशों के जहाजों के लिए खुला रास्ता माना जाता था, लेकिन ईरान अब इस पर अपने अधिकार और सुरक्षा हितों को लेकर सख्त रुख अपना रहा है.
अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत फिलहाल लगभग रुक गई है. दोनों देशों के बीच हुए अंतरिम समझौते के बाद शुरू हुई 60 दिन की अवधि भी इस हफ्ते खत्म हो गई. इस समझौते का उद्देश्य आगे विस्तृत बातचीत का रास्ता तैयार करना था, लेकिन फिलहाल इसे आगे बढ़ाने के संकेत नहीं मिल रहे हैं. ट्रंप ने भी साफ कर दिया है कि इस समय ईरान के साथ किसी नई बातचीत की योजना तय नहीं है. ऐसे में अब सबसे ज्यादा ध्यान ईरान और ओमान के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर चल रही बातचीत पर है.
ईरान और ओमान पिछले कई हफ्तों से इस समुद्री रास्ते से जहाजों की सुरक्षित आवाजाही को लेकर चर्चा कर रहे हैं. ओमान ने इस मामले में सार्वजनिक रूप से सीमित जानकारी दी है, जबकि तेहरान का कहना है कि दोनों पक्ष एक साझा बयान को अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहे हैं.
क्षेत्रीय अधिकारियों के अनुसार, संभावित समझौते में जहाजों के आने-जाने के लिए अलग-अलग मार्ग तय किए जा सकते हैं. प्रस्ताव के तहत खाड़ी में प्रवेश करने वाले जहाज ईरान के नियंत्रण वाले रास्ते का इस्तेमाल कर सकते हैं, जबकि बाहर निकलते समय ओमान के नियंत्रण वाले मार्ग से गुजर सकते हैं. इसमें सुरक्षा व्यवस्था और संभावित शुल्क जैसी बातें भी शामिल हो सकती हैं. हालांकि इस समझौते की राह आसान नहीं मानी जा रही है. अधिकारियों का कहना है कि किसी बड़े समझौते के लिए अमेरिका को ईरानी बंदरगाहों पर लगी अपनी पाबंदियों में बदलाव करना पड़ सकता है.
करीब 50 लाख की आबादी वाला ओमान खाड़ी क्षेत्र के अपेक्षाकृत शांत देशों में गिना जाता है. मौजूदा संघर्ष के दौरान उसे सीधे निशाना नहीं बनाया गया है. हालांकि ओमान अमेरिकी सेना को अपनी कुछ सुविधाओं के इस्तेमाल की अनुमति देता है, लेकिन अमेरिका के साथ उसके रक्षा संबंध यूएई जैसे देशों की तुलना में सीमित बताए जाते हैं.
ओमान लंबे समय से ईरान के साथ बातचीत और कूटनीतिक समाधान का समर्थन करता रहा है. इस महीने की शुरुआत में उसने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़े संवाद को सकारात्मक और रचनात्मक बताया था. साथ ही समुद्री जहाजों पर हो रहे हमलों की भी निंदा की थी. मंगलवार को ओमान और मिस्र के विदेश मंत्रियों की बैठक के बाद मिस्र ने कहा कि इस तरह का समझौता अमेरिका और ईरान के बीच व्यापक और स्थायी समाधान की दिशा में रास्ता खोल सकता है.
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि ट्रंप की धमकी का ओमान और ईरान की बातचीत पर कितना असर पड़ेगा. मिडटर्म चुनाव नजदीक आने के साथ ट्रंप प्रशासन पर दबाव बढ़ता दिख रहा है और दुनिया की नजर अब स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर बनने वाले अगले घटनाक्रम पर टिकी है.