ईरान के हथियार भंडार को फिर भर रहा रूस? कैस्पियन सागर के जरिए भेजे ड्रोन पार्ट्स और गोला-बारूद

अमेरिका और इजराइल के साथ संघर्ष के बाद ईरान अपने सैन्य भंडार को फिर मजबूत करने में जुटा है. इस बीच रूस से कैस्पियन सागर के रास्ते संवेदनशील सैन्य सामान भेजे जाने के दावे ने नई हलचल पैदा कर दी है.

Date Updated Last Updated : 19 August 2026, 11:06 AM IST
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Courtesy: AI Generated

नई दिल्ली: अमेरिका और इजराइल के साथ हालिया युद्ध में अपने सैन्य भंडार को बड़ा नुकसान झेलने के बाद ईरान अब दोबारा तैयारी में जुट गया है. इस बीच एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि रूस कैस्पियन सागर के रास्ते ईरान को विस्फोटक, ड्रोन के पुर्जे और गोला-बारूद भेज रहा है. बताया जा रहा है कि यह सप्लाई ईरान की कमजोर पड़ी सैन्य क्षमता को फिर से मजबूत करने में मदद कर सकती है.

NBC न्यूज को मिले एक यूरोपीय सरकारी दस्तावेज और एक पश्चिमी अधिकारी की पुष्टि के अनुसार, रूस से भेजी जा रही कथित खेप में TNT, ड्रोन के पार्ट्स और गोला-बारूद शामिल हैं. वहीं, विशेषज्ञों द्वारा देखी गई सैटेलाइट तस्वीरों में बैलिस्टिक मिसाइलों के निर्माण से जुड़े कुछ उपकरणों या हिस्सों के होने के भी संकेत मिले हैं.

रूस और ईरान के सैन्य रिश्तों में बदला समीकरण

इन कथित सैन्य ट्रांसफर को मॉस्को और तेहरान के बीच बदलते रक्षा संबंधों के तौर पर देखा जा रहा है. पहले तस्वीर बिल्कुल अलग थी. यूक्रेन युद्ध के दौरान ईरान ने रूस को बड़ी संख्या में शाहेद जैसे ड्रोन उपलब्ध कराए थे. अब रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि भूमिकाएं बदलती नजर आ रही हैं और रूस ईरान को अपने हथियारों और सैन्य क्षमता को दोबारा तैयार करने में मदद कर रहा है. हालांकि रूस और ईरान की ओर से इन कथित शिपमेंट्स को लेकर सार्वजनिक रूप से विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है.

कैस्पियन सागर का रास्ता क्यों अहम है?

कैस्पियन सागर रूस और ईरान के अलावा कजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और अजरबैजान से घिरा हुआ है. इस समुद्री क्षेत्र पर इन्हीं पांच देशों का अधिकार है. ऐसे में पश्चिमी देशों के नौसैनिक जहाजों के लिए यहां सीधे पहुंचना बेहद सीमित है. रिपोर्ट के अनुसार, इस वजह से रूसी और ईरानी बंदरगाहों के बीच जाने वाले मालवाहक जहाजों को रोकना आसान नहीं है. कुछ जहाज यात्रा के दौरान अपना ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम भी बंद कर सकते हैं, जिससे उनकी गतिविधियों पर नजर रखना और मुश्किल हो जाता है. यह मार्ग उन प्रमुख समुद्री रास्तों से भी अलग है, जहां अमेरिका और उसके सहयोगी देशों की मजबूत मौजूदगी है. इसी कारण कैस्पियन सागर कथित सैन्य सप्लाई के लिए एक महत्वपूर्ण रास्ता बन सकता है.

इजराइली हमलों के बाद बढ़ी जरूरत

ये कथित ट्रांसफर इस साल की शुरुआत में इजराइल द्वारा किए गए हमलों के बाद सामने आए हैं. रिपोर्टों के मुताबिक, इन हमलों में कैस्पियन सागर के किनारे स्थित ईरानी बंदरगाह बंदर अंजली को भी निशाना बनाया गया था. इसे सैन्य सप्लाई नेटवर्क का एक अहम हिस्सा माना जाता था. हालिया संघर्ष में ईरान ने बड़ी संख्या में ड्रोन का इस्तेमाल किया था और उसके हथियार भंडार को भी नुकसान पहुंचा. इसके अलावा अमेरिका और इजराइल के हमलों में मिसाइल ढांचे और अन्य सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया गया.

रूस से कथित रूप से मिल रही यह मदद ईरान को अपने कुछ हथियार भंडार दोबारा तैयार करने में सहारा दे सकती है. हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि रूस ने कुल कितना सैन्य सामान भेजा है और ईरान की सैन्य तैयारी किस स्तर तक पहुंच चुकी है. आने वाले समय में यह सैन्य सहयोग क्षेत्र में शक्ति संतुलन को लेकर नई चिंता पैदा कर सकता है.

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