नई दिल्ली: बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रही हैं. ताजा मामला सिलहट जिले के गोवाइनघाट इलाके का है, जहां एक हिंदू शिक्षक के घर पर दोबारा हमला कर आग लगा दी गई. यह घटना ऐसे समय सामने आई है, जब हाल के दिनों में हत्या, जेल में मौत और धमकियों जैसी कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं. इन वारदातों ने न सिर्फ स्थानीय हिंदू समुदाय को झकझोर दिया है, बल्कि प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए हैं.
सिलहट जिले के गोवाइनघाट क्षेत्र के बहोर गांव में रहने वाले हिंदू शिक्षक बिरेंद्र कुमार डे के घर को देर रात निशाना बनाया गया. स्थानीय लोग उन्हें ‘झुनू सर’ के नाम से जानते हैं. हमलावरों ने घर में आग लगा दी, जिससे भारी नुकसान हुआ. राहत की बात यह रही कि परिवार के सभी सदस्य समय रहते बाहर निकल आए. ग्रामीणों का कहना है कि यह हमला सुनियोजित था और पहले की घटनाओं की कड़ी का हिस्सा है.
स्थानीय सूत्रों के अनुसार, बिरेंद्र कुमार डे का घर पहले भी हमले का शिकार हो चुका है. बार-बार एक ही परिवार को निशाना बनाए जाने से इलाके के हिंदू परिवारों में दहशत का माहौल है. लोगों का कहना है कि हमलावर बेखौफ हैं, क्योंकि अब तक किसी भी मामले में ठोस कार्रवाई नजर नहीं आई. इससे असुरक्षा की भावना और गहरी होती जा रही है.
घटना के बाद गांव के लोगों ने प्रशासन से आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी और सख्त कार्रवाई की मांग की है. हालांकि, खबर लिखे जाने तक किसी भी गिरफ्तारी की आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी थी. स्थानीय हिंदू समुदाय का आरोप है कि जांच में देरी और कमजोर कार्रवाई से अपराधियों के हौसले बढ़ते हैं. वे चाहते हैं कि सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए और दोषियों को सजा मिले.
यह हमला अकेली घटना नहीं है. 11 जनवरी को फेनी जिले में 28 वर्षीय समीर कुमार दास की हत्या कर दी गई थी. उनका शव खून से सना मिला था और उनकी ऑटोरिक्शा गायब थी. इसके अगले दिन, 12 जनवरी को अवामी लीग से जुड़े संगीतकार और सांस्कृतिक कार्यकर्ता प्रोलय चाकी की जेल में मौत हो गई. परिवार ने इलाज में लापरवाही और बदसलूकी के आरोप लगाए.
लगातार हो रही इन घटनाओं से बांग्लादेश के हिंदू अल्पसंख्यकों में डर और असुरक्षा गहराती जा रही है. मानवाधिकार संगठनों का कहना है कि हिंसा, हत्याएं और हिरासत में मौतें गंभीर चिंता का विषय हैं. स्थानीय हिंदू परिवारों का मानना है कि जब तक मामलों में तेज और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं होगी, तब तक उनका भरोसा बहाल होना मुश्किल है.