नई दिल्ली: अमेरिका और वेनेजुएला के बीच हाल के घटनाक्रमों ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है. अमेरिका वेनेजुएला के बीच चल रहे तनाव के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का एक बयान सामने आया है जिसमें वह वेनेजुएला पर शासन करने का दावा कर रहे हैं लेकिन उनके विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने अलग सुर अलापना शुरु कर दिया है. उन्होंने अब ट्रंप के बयान के बाद सफाई दी है. जिससे स्थिति को समझना थोड़ा आसान हो गया है.
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि अमेरिका फिलहाल वेनेजुएला का शासन करेगा. यह बयान ऐसे समय आया जब अमेरिका ने 'ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व' के तहत रात भर सैन्य कार्रवाई की. इस ऑपरेशन में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को गिरफ्तार कर अमेरिका ले जाया गया.
ट्रम्प के इस बयान से यह संदेश गया कि अमेरिका सीधे तौर पर वेनेजुएला पर शासन करने जा रहा है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई.
इसके बाद अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने ट्रम्प के बयान को स्पष्ट किया. उनका कहना है कि अमेरिका वेनेजुएला का प्रत्यक्ष शासन नहीं करेगा. ट्रम्प का शासन से मतलब सीधा नियंत्रण नहीं, बल्कि दबाव बनाकर बदलाव लाना है.
रुबियो ने आगे बताया कि अमेरिका वेनेजुएला के तेल कारोबार पर पहले से लगी तेल नाकाबंदी (ऑयल क्वारंटाइन) को सख्ती से लागू करता रहेगा. इस नाकाबंदी का उद्देश्य वेनेजुएला की मौजूदा सत्ता पर आर्थिक दबाव बनाना है, ताकि वहां नीतिगत बदलाव हों.
बता दें अमेरिका ने कई ऐसे तेल टैंकरों को रोका या जब्त किया है जो प्रतिबंधों के बावजूद वेनेजुएला से तेल का व्यापार कर रहे थे.
साथ ही रुबियो ने यह आश्वासन भी दिया कि अमेरिका वेनेजुएला में लंबे समय तक फंसना नहीं चाहता. हालांकि, उन्होंने आगे अपने बयान में यही भी जोड़ा कि भविष्य की रणनीति वेनेजुएला में सत्ता संभाल रहे लोगों के व्यवहार और फैसलों पर निर्भर करेगी.
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका की मौजूदा सैन्य तैनाती ड्रग्स की तस्करी करने वाली नौकाओं और प्रतिबंधित टैंकरों को रोकने के लिए पर्याप्त है.