तनाव से छोटा होता है DNA, समय से पहले बुढ़ापा: हार्वर्ड की रिसर्चतनाव का DNA पर गहरा असर

हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की एक ताजा रिसर्च ने खुलासा किया है कि लंबे समय तक तनाव (क्रोनिक स्ट्रेस) न केवल मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि यह हमारे DNA के टेलोमियर्स को भी छोटा कर देता है.

Date Updated Last Updated : 09 July 2025, 08:16 PM IST
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Stress and DNA: हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की एक ताजा रिसर्च ने खुलासा किया है कि लंबे समय तक तनाव (क्रोनिक स्ट्रेस) न केवल मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित करता है, बल्कि यह हमारे DNA के टेलोमियर्स को भी छोटा कर देता है. टेलोमियर्स DNA के सिरों पर मौजूद सुरक्षात्मक परत होते हैं, जो कोशिकाओं को स्थिर और स्वस्थ रखते हैं.

ये जूते के फीते के सिरों पर लगे प्लास्टिक कवर की तरह काम करते हैं. जब ये टेलोमियर्स छोटे होते हैं, तो कोशिकाएं जल्दी बूढ़ी हो जाती हैं, जिससे शरीर में उम्र बढ़ने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है.

बॉडी एजिंग का क्या है मतलब?

टेलोमियर्स कोशिकाओं को नुकसान से बचाते हैं, लेकिन हर कोशिका विभाजन के साथ ये थोड़े छोटे होते जाते हैं. जब ये बहुत छोटे हो जाते हैं, तो कोशिकाएं मरने लगती हैं या कार्यक्षमता खो देती हैं. इसे ही बॉडी एजिंग कहते हैं. रिसर्च के अनुसार, लंबे समय तक तनाव, जैसे पारिवारिक समस्याएं, आर्थिक दबाव, या काम का तनाव, कोर्टिसोल जैसे हार्मोन को बढ़ाता है. यह ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन को बढ़ावा देता है, जो टेलोमियर्स को तेजी से छोटा करता है.

उम्र बढ़ने से कैसे बचें?

रिसर्च में पाया गया कि बचपन में तनाव का सामना करने वाले बच्चों और युवाओं में टेलोमियर्स की लंबाई सामान्य से कम होती है. मेडिकल इंटर्न्स जैसे युवा डॉक्टरों में भी तनाव के कारण एक साल में टेलोमियर्स में कमी देखी गई. इससे थकान, कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता और बीमारियों का जोखिम बढ़ता है.

तनाव को कम करने के लिए योग, ध्यान, नियमित व्यायाम और पर्याप्त नींद जरूरी है. ये उपाय न केवल मन को शांत रखते हैं, बल्कि कोशिकाओं को स्वस्थ और युवा बनाए रखते हैं. मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना अब जरूरी है.

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