नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के आने के बाद उम्मीद की जा रही थी कि यह कर्मचारियों का काम आसान करेगा और कम समय में ज्यादा काम करने में मदद करेगा. हालांकि, बेंगलुरु की एक टेक प्रोफेशनल रुपाली तिवारी का अनुभव इससे अलग है. उनका कहना है कि AI ने काम का बोझ कम करने के बजाय कर्मचारियों से होने वाली उम्मीदों को कई गुना बढ़ा दिया है.
रुपाली ने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर कर AI के बढ़ते इस्तेमाल और टेक इंडस्ट्री में बदलते वर्क कल्चर पर बात की है. उनके मुताबिक, AI टूल्स के आने के बाद कई मैनेजर और टीम लीड यह मानने लगे हैं कि जब तकनीक काम को तेजी से पूरा कर सकती है, तो कर्मचारी भी पहले की तुलना में काफी ज्यादा जिम्मेदारियां संभाल सकते हैं.
रुपाली ने बताया कि जब AI का इस्तेमाल शुरू हुआ था, तब कर्मचारियों के बीच नौकरी जाने की चिंता जरूर थी. दूसरी तरफ, रोजमर्रा के कई काम आसान होने लगे थे और ऐसा लग रहा था कि AI लोगों का वर्कलोड कम कर देगा। लेकिन कुछ समय बाद स्थिति बदलने लगी. उनके मुताबिक, कंपनियों और मैनेजर्स की अपेक्षाएं बढ़ती गई. उनका कहना है कि पहले जिस कर्मचारी को करीब पांच काम दिए जाते थे, अब उसी से 20 से 25 तक काम संभालने की उम्मीद की जा रही है.
रुपाली ने अपने एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर दोस्त का उदाहरण देते हुए बताया कि वह एक बड़ी कंपनी में एक साथ करीब 10 प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है. वह कोडिंग से लेकर कोड रिव्यू और डिप्लॉयमेंट तक की जिम्मेदारी संभाल रहा है.
टेक प्रोफेशनल का कहना है कि AI ने काम की रफ्तार जरूर बढ़ाई है, लेकिन इसके साथ आउटपुट की उम्मीद भी तेजी से बढ़ी है. उन्हें लगता है कि कंपनियां अब कई सालों में होने वाले काम को कुछ महीनों या एक-दो साल में पूरा करने की उम्मीद करने लगी हैं. इतना ही नहीं रुपाली के वीडियो पर कई यूजर्स ने भी अपनी सहमति जताई.
कुछ लोगों ने कहा कि AI ने उनकी प्रोडक्टिविटी बढ़ाई है, लेकिन उसके साथ काम का दबाव भी बढ़ा है. वहीं, कुछ यूजर्स ने माना कि AI के कारण कंपनियां कर्मचारियों से ज्यादा आउटपुट की उम्मीद करने लगी हैं. ऐसे में बहस यह है कि AI वास्तव में कर्मचारियों का बोझ कम कर रहा है या कंपनियां इसका इस्तेमाल कम समय में ज्यादा काम करवाने के लिए कर रही हैं.