नई दिल्ली: रक्षाबंधन के दिन बहनें अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती हैं और माथे पर तिलक लगाती हैं. साथ ही, वे भाई की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं. इस साल रक्षाबंधन का त्योहार 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा. यह पर्व हर साल सावन पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है. रक्षाबंधन भाई-बहन के बीच प्यार, विश्वास और मजबूत रिश्ते का प्रतीक माना जाता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि राखी बांधते समय तीन गांठें ही क्यों लगाई जाती हैं? माना जाता है कि यह परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है. आइए जानते हैं राखी की तीन गांठों का धार्मिक और ज्योतिषीय महत्व.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ये तीन गांठें ब्रह्मा, विष्णु और महेश यानी त्रिदेवों के आशीर्वाद का प्रतीक मानी जाती हैं. ऐसा भी माना जाता है कि इससे भाई के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और नकारात्मकता दूर होती है. राखी बांधते समय सही दिशा और शुभ मुहूर्त का ध्यान रखने से पूजा का महत्व और बढ़ जाता है.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राखी की तीन गांठों को ब्रह्मा, विष्णु और महेश यानी त्रिदेवों का प्रतीक माना जाता है. हर गांठ का अपना अलग महत्व बताया गया है.
पहली गांठ – ब्रह्मा: भाई की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और सुखी जीवन की कामना के लिए लगाई जाती है.
दूसरी गांठ – विष्णु: भाई के जीवन में सुख-समृद्धि, सुरक्षा और खुशहाली बनी रहे, ऐसी मान्यता है.
तीसरी गांठ – महेश (शिव): नकारात्मक ऊर्जा से रक्षा और मन की शांति के लिए तीसरी गांठ को शुभ माना जाता है.
ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, राखी की तीन गांठों को ग्रहों के अशुभ प्रभाव को कम करने से भी जोड़ा जाता है. वहीं, इन्हें जीवन के तीन पुरुषार्थों धर्म, अर्थ और काम के संतुलन का प्रतीक भी माना जाता है. मान्यता है कि इससे भाई-बहन के रिश्ते में प्रेम, सुख और आपसी विश्वास बना रहता है.