नई दिल्ली: अगर फिलहाल बच्चा प्लान नहीं कर रहे हैं, तो सही गर्भनिरोधक तरीका चुनना बेहद जरूरी है. बाजार में कंडोम, गर्भनिरोधक गोलियां, कॉपर-टी, इंजेक्शन और इंप्लांट जैसे कई विकल्प मौजूद हैं, लेकिन हर तरीका हर महिला या कपल के लिए समान रूप से सही नहीं होता. किसी भी विकल्प को अपनाने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है.
कंडोम प्रेग्नेंसी रोकने के साथ यौन संचारित संक्रमण (STI) से बचाव में भी मदद करता है. डॉक्टर के अनुसार इसे 10 में 6 की रेटिंग दी जा सकती है. हालांकि इसकी प्रभावशीलता सही इस्तेमाल पर निर्भर करती है. कंडोम फटने, गलत तरीके से पहनने या संभोग के दौरान निकल जाने पर प्रेग्नेंसी का जोखिम रह सकता है.
लंबे समय तक गर्भधारण से बचने के लिए कॉपर-टी एक विकल्प हो सकता है. डॉक्टर ने इसे 8/10 की रेटिंग दी है. इसे प्रशिक्षित डॉक्टर गर्भाशय में लगाते हैं. वहीं, गर्भनिरोधक इंप्लांट लंबे समय तक असर करने वाले और जरूरत पड़ने पर हटाए जा सकने वाले विकल्पों में शामिल है. इसे डॉक्टर की सलाह और निगरानी में ही लगवाना चाहिए. डॉक्टर के अनुसार इसकी रेटिंग 10/10 है.
गर्भनिरोधक पिल्स सही तरीके से और नियमित रूप से लेने पर प्रभावी हो सकती हैं. डॉक्टर ने इन्हें 7/10 की रेटिंग दी है. हालांकि, हर महिला के लिए ये गोलियां उपयुक्त नहीं होती और कुछ लोगों में साइड इफेक्ट हो सकते हैं. इसलिए बिना चिकित्सकीय सलाह के इन्हें शुरू नहीं करना चाहिए.
विदड्रॉल मेथड यानी वीर्य निकलने से पहले लिंग को बाहर निकालना कम भरोसेमंद तरीका है. इसे डॉक्टर ने सिर्फ 2/10 की रेटिंग दी है. इसी तरह संबंध बनाने के बाद पानी से अंदरूनी सफाई करने से गर्भधारण नहीं रुकता. इसे कोई गर्भनिरोधक तरीका नहीं माना जाता.
इमरजेंसी गर्भनिरोधक गोली का इस्तेमाल नियमित गर्भनिरोध के तौर पर नहीं करना चाहिए. यह खास परिस्थितियों में गर्भधारण का जोखिम कम करने के लिए होती है. वहीं गर्भनिरोधक इंजेक्शन लंबे समय तक सुरक्षा दे सकता है, लेकिन इससे कुछ महिलाओं के पीरियड में बदलाव हो सकता है.
नोट: गर्भनिरोधक का चुनाव उम्र, स्वास्थ्य, भविष्य की फैमिली प्लानिंग और अन्य स्थितियों पर निर्भर करता है. सही विकल्प के लिए डॉक्टर से सलाह जरूर लें.