लाल किले पर बंधेज पगड़ी में नजर आए PM मोदी, खास लुक की हो रही चर्चा

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बहुरंगी साफा पहनने की अपनी अनूठी परंपरा को कायम रखते हुए प्रधानमंत्री ने इस बार गहरे लाल रंग की बेहद आकर्षक राजस्थानी 'बंधेज' पगड़ी धारण की।

Date Updated Last Updated : 15 August 2026, 12:32 PM IST
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Courtesy: AI Generated Image

नई दिल्ली: 80वें स्वतंत्रता दिवस के ऐतिहासिक अवसर पर लाल किले के प्राचीर पर आयोजित मुख्य समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पारंपरिक परिधान हर किसी के आकर्षण का केंद्र बना रहा। वर्ष 2014 से स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर बहुरंगी साफा पहनने की अपनी अनूठी परंपरा को कायम रखते हुए प्रधानमंत्री ने इस बार गहरे लाल रंग की बेहद आकर्षक राजस्थानी 'बंधेज' पगड़ी धारण की। लगातार 13वीं बार देश के राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को फहराते हुए पीएम मोदी ने इस पारंपरिक वेशभूषा के माध्यम से भारतीय हस्तकला को वैश्विक पहचान दिलाने और 'वोकल फॉर लोकल' के संकल्प को मजबूत करने का एक बड़ा संदेश दिया। पश्चिमी भारत में बंधेज को बेहद शुभ, उत्सव और सम्मान का प्रतीक माना जाता है। किसी भी बड़े मांगलिक कार्य या सांस्कृतिक उत्सव में इस साफे को पहनना भारतीय परंपरा का अभिन्न हिस्सा रहा है।

भारतीय संस्कृति और गौरव की प्रतीक है बंधेज कला

प्रधानमंत्री द्वारा पहनी गई बंधेज की यह विशेष पगड़ी केवल एक परिधान मात्र नहीं है, बल्कि यह भारतीय हस्तशिल्प और कारीगरों की मेहनत को सम्मानित करने का एक सशक्त माध्यम है। 

बंधेज कला मुख्य रूप से राजस्थान और गुजरात में सदियों से प्रचलित 'टाई एंड डाई' हस्तकला का एक अद्भुत उदाहरण है, जिसमें कपड़ों को धागों से बारीक बांधकर और रंगकर खूबसूरत आकृतियां उभारी जाती हैं। 

साफे का रंग संयोजन और संदेश

इस बार प्रधानमंत्री की पगड़ी का आधार गहरा लाल रंग था, जिस पर सफेद रंग के छोटे-छोटे बिंदुओं का खूबसूरत प्रिंट बना हुआ था। बंधेज कला में लाल रंग को ऊर्जा, शक्ति, उत्साह और शुभता का प्रतीक माना जाता है। पीएम मोदी ने अपने इस विशिष्ट साफे को सादे और शालीन सफेद रंग के कुर्ता-पायजामा और जैकेट के साथ धारण किया था, जिसने उनके पूरे स्वरूप को बेहद संतुलित और प्रभावशाली लुक दिया। इस पहनावे के जरिए देश के बुनकरों, स्थानीय कारीगरों और हस्तशिल्प उद्योग को एक नया प्रोत्साहन मिला है। प्रधानमंत्री हर साल अपने साफे के जरिए देश की विविधता में एकता और सांस्कृतिक समृद्धि की झलक पेश करते हैं। इस बार भी उनका यह बंधेज साफा भारतीय धरोहर के प्रति सम्मान और देशज कलाओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने की उनकी प्रतिबद्धता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है।

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