पटना: बिहार सरकार ने अधिकारियों के लिए विधायकों और सांसदों से बात करने का प्रोटोकॉल बदल दिया है। सम्राट चौधरी सरकार ने साफ निर्देश दिया है कि अब कोई भी अधिकारी जनप्रतिनिधियों के फोन कॉल को नजरअंदाज नहीं करेगा। कॉल आते ही तुरंत जवाब देना होगा और अगर मिस्ड कॉल हो जाए तो तुरंत वापस कॉल करना अनिवार्य होगा।
राज्य के सामान्य प्रशासन विभाग GAD ने शुक्रवार देर रात इसको लेकर नोटिफिकेशन जारी किया है। इसमें कहा गया है कि अधिकारियों को प्रोटोकॉल का सख्ती से पालन करना होगा और सांसदों-विधायकों को उचित सम्मान देना होगा।
दरअसल विधानसभा स्पीकर के पास लगातार विधायकों की शिकायतें पहुंच रही थीं कि अधिकारी फोन नहीं उठाते, मिलने पर सम्मान नहीं देते और पत्रों का जवाब नहीं देते। कई विधायकों ने सदन में भी इस मुद्दे को उठाया था। इसके बाद सरकार को यह कड़ा कदम उठाना पड़ा है।
नए निर्देश के मुताबिक अगर किसी अधिकारी से किसी MP या MLA का कॉल छूट जाता है तो काम से फुरसत मिलते ही सबसे पहले उन्हें उस जनप्रतिनिधि को वापस कॉल करना होगा। फोन पर बातचीत में पद और गरिमा का पूरा ध्यान रखना होगा।
सिर्फ फोन ही नहीं, पत्रों को लेकर भी गाइडलाइन जारी की गई है। जब किसी अधिकारी को विधायक का पत्र मिलता है तो पहले उसकी प्राप्ति की सूचना देनी होगी। उसके बाद तय समय सीमा के भीतर लिखित जवाब देना होगा, जिसमें मुद्दे पर की गई कार्रवाई और मौजूदा स्थिति की पूरी जानकारी हो।
अगर कोई विधायक काम से अधिकारी के ऑफिस आता है तो उसे पद के अनुसार उचित सम्मान और प्रोटोकॉल देना होगा। बैठने की व्यवस्था से लेकर बातचीत तक में मर्यादा का पालन करना होगा।
GAD ने यह निर्देश सभी एडिशनल चीफ सेक्रेटरी, प्रिंसिपल सेक्रेटरी, सेक्रेटरी, विभागाध्यक्षों, DGP, डिविजनल कमिश्नर और सभी जिला मजिस्ट्रेटों को भेजा है। सरकार ने चेतावनी दी है कि प्रोटोकॉल का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अधिकारियों को चुने हुए प्रतिनिधियों के साथ बेहतर समन्वय बनाकर काम करना होगा ताकि जनता के काम तेजी से हो सकें।