नई दिल्ली: भारत में आतंकी वारदातों की साजिश रचकर विदेश में छिपे आतंकियों पर कार्रवाई के लिए भारत अब एक नया कानूनी रास्ता अपनाने की तैयारी में है. इसकी शुरुआत लश्कर-ए-तैयबा के सरगना और 26/11 मुंबई हमलों के मास्टरमाइंड हाफिज सईद के मामले से हो सकती है. पहलगाम आतंकी हमले से जुड़े मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी यानी NIA जल्द ही उसे समन भेजने की तैयारी कर रही है. हाफिज सईद के खिलाफ पहले ही गैर-जमानती वारंट जारी किया जा चुका है.
सूत्रों के अनुसार, विदेश मंत्रालय के जरिए हाफिज सईद तक कानूनी नोटिस पहुंचाने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी. इसके लिए पाकिस्तान में भारतीय उच्चायोग और वहां के विदेश मंत्रालय के माध्यम से कार्रवाई का रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा. सूत्रों का कहना है कि विदेश में बैठे किसी आतंकी के खिलाफ इस तरह की न्यायिक कार्रवाई भारतीय न्याय संहिता की धारा 356 के इस्तेमाल का एक अहम परीक्षण मानी जा रही है.
मामला इसलिए भी खास है क्योंकि आरोपी के भारत की अदालत में पेश होने की संभावना बेहद कम है. ऐसी स्थिति में अदालत की ओर से जारी समन और वारंट का पूरा रिकॉर्ड रखा जाएगा. अगर आरोपी लगातार कानूनी प्रक्रिया से दूरी बनाए रखता है और कोई जवाब नहीं देता, तो उसके खिलाफ आगे की न्यायिक कार्रवाई का आधार मजबूत हो सकता है. इसके बाद अदालत उपलब्ध कानूनी प्रावधानों के तहत मामले को आगे बढ़ा सकती है.
गैर-जमानती वारंट से आगे कैसे बढ़ेगी कार्रवाई?
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, हाफिज सईद को भेजे जाने वाले हर समन और वारंट का दस्तावेजी रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा. इसका मकसद यह दिखाना होगा कि भारत ने आरोपी को कानूनी प्रक्रिया में शामिल होने का पूरा अवसर दिया. पहले पाकिस्तान स्थित भारतीय उच्चायोग के जरिए दस्तावेज भेजे जा सकते हैं. इसके बाद मामला पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के समक्ष भी रखा जाएगा. अगर आरोपी की ओर से कोई सहयोग नहीं मिलता, तो उसके असहयोग और अनुपस्थिति का भी पूरा ब्यौरा केस रिकॉर्ड का हिस्सा बनेगा.
FATF के सामने भी रखा जा सकता है पूरा डोजियर
इस पूरी प्रक्रिया के बाद हाफिज सईद के खिलाफ एक विस्तृत कानूनी और आपराधिक डोजियर तैयार किया जा सकता है. सूत्रों के अनुसार, इस रिकॉर्ड का इस्तेमाल अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी किया जा सकता है. भारत इस डोजियर को फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स यानी FATF के सामने रखने पर भी विचार कर सकता है. इसके जरिए आतंकियों पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ाने, उनकी गतिविधियों पर रोक लगाने और संपत्तियों के खिलाफ कार्रवाई की दिशा में मदद मिल सकती है. अब हाफिज सईद का मामला इस नई कानूनी रणनीति की पहली बड़ी परीक्षा माना जा रहा है.