बिहार सरकार ने किया ऐलान, सोशल मीडिया क्रिएटर्स के 1 लाख व्यूज पर 10 हजार का इनाम

बिहार सरकार ने रजिस्टर्ड सोशल मीडिया क्रिएटर्स को सरकारी योजनाओं पर वीडियो बनाने के बदले व्यूज के आधार पर भुगतान देने का फैसला किया है.

Date Updated Last Updated : 20 August 2026, 04:22 PM IST
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Courtesy: X @samrat4bjpX @samrat4bjp

पटना: बिहार में सोशल मीडिया क्रिएटर्स के लिए सरकार ने बड़ा ऐलान किया है. अब सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों से जुड़े वीडियो बनाने वाले रजिस्टर्ड क्रिएटर्स को उनके वीडियो की पहुंच के आधार पर अतिरिक्त भुगतान मिल सकता है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में बिहार सोशल मीडिया और अन्य ऑनलाइन मीडिया रूल्स, 2026 में बदलाव को मंजूरी दी गई है.

1 लाख व्यूज पर मिलेंगे 10 हजार रुपये

नए नियम के मुताबिक, सरकार की मीडिया गाइडलाइन के तहत पंजीकृत सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स और ऑनलाइन कंटेंट क्रिएटर्स को वीडियो के प्रदर्शन के आधार पर भुगतान किया जाएगा. वीडियो अपलोड होने के 30 दिन बाद अगर उसे 1 लाख व्यूज मिलते हैं, तो क्रिएटर को अतिरिक्त 10 हजार रुपये दिए जाएंगे. 

हालांकि, एक वीडियो के लिए इस तरह मिलने वाली अधिकतम रकम 1 लाख रुपये होगी. यानी किसी वीडियो को कई लाख या उससे ज्यादा व्यूज मिलने पर भी अतिरिक्त भुगतान की सीमा एक लाख रुपये से आगे नहीं जाएगी.

फॉलोअर्स की भी होगी निगरानी

सरकार ने रजिस्टर्ड सोशल मीडिया अकाउंट्स, पेज और चैनलों के फॉलोअर्स की नियमित जांच का प्रावधान भी रखा है. इसका मकसद सरकारी योजनाओं का प्रचार करने वाले क्रिएटर्स की विश्वसनीयता और पारदर्शिता बनाए रखना है.

इसका मतलब यह है कि केवल बड़ी संख्या में फॉलोअर्स होना पर्याप्त नहीं होगा. सरकार संबंधित सोशल मीडिया हैंडल की गतिविधियों और फॉलोअर्स की स्थिति पर भी नजर रख सकती है.

AI के क्षेत्र में भी बड़ा कदम

कैबिनेट ने बिहार के सूचना प्रौद्योगिकी विभाग और Taiyo AI India Pvt Ltd के बीच समझौते को भी मंजूरी दी है. इसके जरिए राज्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इकोसिस्टम विकसित करने की योजना है.

AI आधारित सिस्टम की मदद से सरकारी परियोजनाओं की निगरानी, काम में देरी और बढ़ती लागत जैसी समस्याओं का पहले पता लगाने की कोशिश की जाएगी. डेटा एनालिटिक्स और जियोस्पेशियल तकनीक का इस्तेमाल भी किया जाएगा.

फैसले पर उठ सकते हैं सवाल

सरकार के इस फैसले पर राजनीतिक बहस भी शुरू हो सकती है. सवाल यह है कि सरकारी पैसे से बनाए जाने वाले वीडियो केवल योजनाओं की जानकारी देंगे या सरकार के प्रचार का माध्यम भी बनेंगे. ऐसे में सरकार के सामने योजनाओं की जानकारी और राजनीतिक प्रचार के बीच स्पष्ट अंतर बनाए रखने की चुनौती होगी.

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