छात्र आंदोलन के दौरान AK-47 से चलीं गोलियां, बिहार सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में बताया कारण

बिहार सरकार ने छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस पर लगे अत्यधिक बल प्रयोग के आरोपों को सुप्रीम कोर्ट में खारिज किया है. सरकार ने बताया कि सिवान में भीड़ में घिरे एक पुलिसकर्मी ने आत्मरक्षा में AK-47 से हवा में चार राउंड फायर किए, लेकिन कोई घायल नहीं हुआ.

Date Updated Last Updated : 18 August 2026, 05:43 PM IST
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Courtesy: X/ @saurabhsawarn1

पटना: बिहार में छात्र आंदोलनों के दौरान पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवालों को लेकर राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना जवाब दाखिल किया है. बता दें,  सरकार ने पुलिस पर लगाए गए अत्यधिक और अनुचित बल प्रयोग के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए हालात के मुताबिक कार्रवाई की गई थी. 

सरकार ने सिवान में हुई एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि प्रदर्शन के दौरान एक पुलिसकर्मी भीड़ के बीच घिर गया था. इस दौरान खुद को बचाने के लिए उसने अपनी AK-47 से हवा में चार राउंड फायर किए. सरकार के मुताबिक, इस फायरिंग में किसी प्रदर्शनकारी या अन्य व्यक्ति को चोट नहीं लगी. 

AK-47 जैसे हथियार को इस्तेमाल को बताया गलत 

हालांकि, बिहार पुलिस ने माना कि सामान्य कानून-व्यवस्था की स्थिति में AK-47 जैसे हथियार का इस्तेमाल उचित नहीं था. इसे विभागीय नियमों के खिलाफ मानते हुए संबंधित कांस्टेबल को निलंबित कर दिया गया है और उसके खिलाफ विभागीय जांच शुरू की गई है. पुलिस विभाग के मुताबिक, AK-47 का इस्तेमाल आम भीड़ नियंत्रण के बजाय विशेष अभियानों के लिए किया जाता है. इस संबंध में DGP की ओर से आवश्यक दिशा-निर्देश भी जारी किए गए हैं. 

9-MM पिस्टल से भी हुई हवाई फायरिंग

हलफनामे में हाथी चौक के पास हुई एक अन्य घटना का भी उल्लेख है. सरकार के अनुसार, स्थिति को काबू में करने के लिए एक ASI ने अपनी 9-MM पिस्टल से दो बार हवा में गोली चलाई. इस दौरान तीन आंदोलनकारियों को मामूली चोटें आईं. सरकार ने कहा कि इन चोटों का AK-47 से हुई फायरिंग से कोई संबंध नहीं है, क्योंकि घायल लोग उस स्थान पर मौजूद नहीं थे जहां AK-47 से गोली चलाई गई थी. मामले में वैज्ञानिक और बैलिस्टिक रिपोर्ट का अभी इंतजार है. 

हिंसा के पीछे उपद्रवी तत्वों का दावा

वहीं राज्य सरकार ने कहा कि शुरुआत में छात्र प्रदर्शन शांतिपूर्ण था, लेकिन बाद में कुछ उपद्रवी तत्व भीड़ में शामिल हो गए. इसके बाद पथराव और तोड़फोड़ जैसी घटनाएं हुईं। सरकार के मुताबिक, हिंसा में करीब 157 पुलिसकर्मी और 7 अन्य सरकारी कर्मचारी घायल हुए. 

हलफनामे के अनुसार, 22 से 25 जुलाई 2026 के बीच राज्य में 69 एफआईआर दर्ज की गईं और करीब 500 लोगों को गिरफ्तार किया गया. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद बिना आपराधिक इतिहास वाले 222 छात्र प्रदर्शनकारियों को जमानत पर रिहा किया गया, जबकि 75 किशोरों को किशोर न्याय बोर्ड की प्रक्रिया के तहत छोड़ा गया. 

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