ग्लेशियर पिघला तो सामने आया 34 साल पुराना राज, 2 पर्वतारोहियों के शव बरामद

स्विट्जरलैंड के आल्प्स में 1992 से लापता दो बेल्जियन पर्वतारोहियों के शव 34 साल बाद एक ग्लेशियर से मिले हैं. DNA जांच से पहचान होने के बाद यह पुराना रहस्य सुलझ गया, जबकि पिघलते ग्लेशियरों ने नई चिंता बढ़ाई है.

Date Updated Last Updated : 22 August 2026, 03:23 PM IST
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Courtesy: AI generated

नई दिल्ली: स्विट्जरलैंड के बर्फीले आल्प्स में 34 साल पुराना एक रहस्य आखिरकार सामने आ गया है. साल 1992 में पहाड़ों पर चढ़ाई के दौरान लापता हुए दो बेल्जियन पर्वतारोहियों के शव अब एक ग्लेशियर से मिले हैं. दशकों तक बर्फ की मोटी परत के नीचे दबे रहे ये शव बर्फ पिघलने के बाद दिखाई दिए. DNA जांच ने दोनों की पहचान की पुष्टि कर दी है. यह घटना 26 जुलाई की है, जब एक हाइकर ने ट्रिफ्ट ग्लेशियर पर दो शव देखे. सूचना मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों शवों को ग्लेशियर से बाहर निकाला गया. इसके बाद उन्हें पहचान के लिए सायन स्थित अस्पताल भेजा गया.

पुलिस ने DNA जांच के जरिए पुष्टि की कि ये वही दो बेल्जियन पर्वतारोही हैं, जो 1992 में वाइसमीस पहाड़ के पास लापता हो गए थे. लापता होने के समय उनकी उम्र 39 और 41 साल थी. माना जा रहा है कि किसी हादसे के बाद दोनों ग्लेशियर की बर्फ में दब गए होंगे. उस समय उनका कोई पता नहीं चल सका और वर्षों तक उनकी तलाश अधूरी रही. अब बर्फ पिघलने के कारण उनके अवशेष सतह पर दिखाई देने लगे, जिससे 34 साल पुरानी गुत्थी सुलझ गई.

4,000 मीटर से अधिक ऊंचे पहाड़ के पास हुए थे लापता

दोनों पर्वतारोही वाइसमीस पर्वत के आसपास लापता हुए थे. यह पहाड़ 4,000 मीटर से अधिक ऊंचा है और स्विट्जरलैंड की सास वैली में स्थित है. यह इलाका पर्वतारोहण के लिए काफी प्रसिद्ध माना जाता है, लेकिन ऊंचाई और बदलते मौसम के कारण यहां जोखिम भी बना रहता है. वालिस पुलिस के पास 1925 से पहाड़ी और अन्य इलाकों में लापता हुए लोगों का रिकॉर्ड मौजूद है. इन दोनों पर्वतारोहियों के बारे में भी 1992 के बाद कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी थी.

पहले भी ग्लेशियर से मिल चुके हैं पुराने अवशेष

स्विट्जरलैंड में बर्फ पिघलने के बाद दशकों पुराने मानव अवशेष मिलने के मामले पहले भी सामने आ चुके हैं. साल 2023 में मैटर्होर्न के पास एक ग्लेशियर से इंसानी अवशेष मिले थे. जांच के बाद उनकी पहचान एक जर्मन पर्वतारोही के रूप में हुई थी, जो 1986 से लापता था.

तेजी से पिघल रहे हैं स्विट्जरलैंड के ग्लेशियर

इस ताजा मामले ने ग्लेशियरों के तेजी से पिघलने की चिंता को भी फिर सामने ला दिया है. Glamos के आंकड़ों के अनुसार, 2015 से 2025 के बीच स्विट्जरलैंड के ग्लेशियरों ने करीब 25 प्रतिशत बर्फ खो दी. सिर्फ 2025 में ही बर्फ की मात्रा में लगभग 3 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई. बढ़ते तापमान और कम बर्फबारी का असर लगातार पहाड़ी क्षेत्रों पर पड़ रहा है. इसका प्रभाव सिर्फ ग्लेशियरों तक सीमित नहीं है, बल्कि स्की रिसॉर्ट और बर्फ से जुड़े पर्यटन पर भी दिखाई दे रहा है. 34 साल बाद मिले इन दोनों पर्वतारोहियों के शव एक ओर उनके परिवारों की लंबी तलाश का अंत हैं, तो दूसरी ओर बदलते पर्यावरण की गंभीर तस्वीर भी पेश करते हैं.

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