राजस्थान के सरकारी स्कूलों का हाल बेहाल, हजारों स्कूलों में टॉयलेट तक नहीं

जयपुर के पास एक सरकारी स्कूल के बच्चों के तबेले में पढ़ने की खबर ने राजस्थान की शिक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, राज्य में सैकड़ों स्कूल बिना भवन और हजारों जरूरी सुविधाओं की कमी से जूझ रहे हैं.

Date Updated Last Updated : 22 August 2026, 02:43 PM IST
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Courtesy: AI generated

जयपुर: राजस्थान के जयपुर के पास बगरू गांव से सामने आई एक तस्वीर ने सरकारी स्कूलों की हालत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. यहां एक सरकारी स्कूल के छोटे बच्चे कथित तौर पर भैंसों के तबेले में पढ़ाई करने को मजबूर हैं. गोबर और चारे के बीच लगने वाली कक्षाओं की जानकारी मिलने के बाद जब 'कॉकरोच जनता पार्टी' यानी CJP की एक टीम स्कूल का निरीक्षण करने पहुंची, तो वहां कथित तौर पर उन पर हमला भी हुआ. अब राज्य सरकार के आंकड़ों ने राजस्थान के स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं की एक बड़ी तस्वीर सामने रख दी है.

जानकारी के अनुसार, बगरू स्थित सरकारी स्कूल की पुरानी इमारत को करीब एक साल पहले जर्जर और बच्चों के लिए असुरक्षित घोषित कर दिया गया था. इसके बाद स्कूल भवन को बंद कर दिया गया और बच्चों को वहां जाने से रोक दिया गया. स्कूल के छात्रों को इसके बाद पास की एक गौशाला के टीन शेड में शिफ्ट कर दिया गया. 

आरोप है कि जिस जगह बच्चों की कक्षाएं लगाई जा रही हैं, वहां भैंसें भी रखी जाती हैं और आसपास गोबर तथा चारा मौजूद रहता है. ऐसे माहौल में छोटे बच्चों को पढ़ाई करनी पड़ रही है. शुक्रवार को CJP के सह-संयोजक आशुतोष रांका के नेतृत्व में एक टीम स्कूल की स्थिति देखने पहुंची थी. आरोप है कि निरीक्षण के दौरान टीम के सदस्यों पर हमला किया गया, जिसमें कई लोगों को चोटें आईं. टीम को वहां से निकलना पड़ा.

राजस्थान में 611 स्कूल बिना इमारत के

बगरू का यह स्कूल अकेला नहीं है. राजस्थान सरकार ने विधानसभा में स्वीकार किया है कि राज्य में बड़ी संख्या में सरकारी स्कूलों के पास अपनी इमारत नहीं है. विपक्ष के नेता टीकाराम जूली के सवाल के जवाब में सरकार ने बताया कि समग्र शिक्षा अभियान के तहत 2025-26 के UDISE आंकड़ों के अनुसार, राजस्थान में 611 सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जिनकी अपनी इमारत नहीं है. इनमें 10 लड़कियों के स्कूल भी शामिल हैं. जयपुर में भी ऐसे 38 स्कूल बताए गए हैं, जो बिना स्थायी भवन के चल रहे हैं. कई जगह बच्चों की पढ़ाई खुले स्थानों या अस्थायी शेड में कराई जा रही है.

हजारों स्कूलों में शौचालय और पीने के पानी की कमी

राज्य में 64,484 सरकारी स्कूलों के पास अपनी इमारत है, लेकिन इनमें से कई स्कूल आज भी जरूरी सुविधाओं से दूर हैं. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2,047 स्कूलों में शौचालय की सुविधा नहीं है. वहीं, 1,049 स्कूल ऐसे हैं, जहां बच्चों के लिए पीने के पानी की उचित व्यवस्था नहीं है. बिना भवन वाले स्कूलों की संख्या कुछ जिलों और ब्लॉकों में अधिक है. 

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक झालावाड़ के अकलेरा ब्लॉक में सबसे ज्यादा 23 स्कूल बिना भवन के चल रहे हैं. इसके बाद खानपुर में 16 और झालरापाटन में 11 ऐसे स्कूल हैं. फलोदी में 11 और बांसवाड़ा के छोटीसरवन में 10 स्कूल बिना भवन के बताए गए हैं.

स्कूलों के लिए हजारों करोड़ रुपये की योजना

राज्य सरकार ने कहा है कि स्कूलों की खराब इमारतों की मरम्मत और नवीनीकरण के लिए 550 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रावधान किया गया है. इसके अलावा, 450 करोड़ रुपये की लागत से नई इमारतें बनाने की योजना भी है. सरकार के अनुसार, जर्जर और बिना भवन वाले स्कूलों में नई इमारत, मरम्मत और रखरखाव के लिए हर साल 2,500 करोड़ रुपये उपलब्ध कराए जाएंगे. पांच साल में इस काम पर 12,500 करोड़ रुपये खर्च करने की योजना है. यह राशि DMFT, समग्र शिक्षा, राज्य कोष, SDRF, CSR और अन्य स्रोतों से जुटाने की बात कही गई है.

विपक्ष ने सरकार की योजना पर उठाए सवाल

विपक्ष के नेता टीकाराम जूली ने सरकार की तैयारियों पर सवाल उठाए हैं. उनका दावा है कि पिछले साल के ऑडिट में 3,700 से अधिक स्कूल पूरी तरह जर्जर और असुरक्षित पाए गए थे. उनका कहना है कि कई स्कूलों को बंद करना पड़ा या बच्चों को दूसरी जगह भेजना पड़ा, जिससे नए दाखिलों पर भी असर पड़ा. विपक्ष ने सरकार से जल्द और ठोस कदम उठाने की मांग की है, ताकि बच्चों को सुरक्षित और बुनियादी सुविधाओं वाले स्कूलों में पढ़ाई का अधिकार मिल सके.

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