नई दिल्ली: भारत में अलग-अलग राज्यों की सीमाएं आमतौर पर नक्शे और जमीन के स्तर पर तय होती हैं, लेकिन महाराष्ट्र और तेलंगाना की सीमा पर एक ऐसा घर मौजूद है, जिसके बीच से ही दोनों राज्यों की सीमा गुजरती है. इस वजह से इस मकान के कुछ कमरे महाराष्ट्र में हैं, जबकि बाकी हिस्सा तेलंगाना में आता है. यहीं वजह है कि पवार परिवार का यह घर अपनी अनोखी भौगोलिक स्थिति के कारण चर्चा में रहता है. क्या है इस मकान में खास चलिए जानते है.
यह मकान महाराष्ट्र के चंद्रपुर जिले की जिवती तहसील के महाराजगुडा गांव में स्थित बताया जाता है. घर में करीब 12 से 13 लोग रहते हैं. परिवार के मुताबिक, मकान के लगभग आधे हिस्से पर महाराष्ट्र का अधिकार क्षेत्र है और बाकी हिस्सा तेलंगाना में आता है. इतना ही नहीं घर के एक हिस्से में हॉल और बेडरूम हैं, जबकि रसोई समेत कुछ कमरे दूसरे राज्य की सीमा में पड़ते हैं.
इस अनोखी स्थिति की वजह 1969 में हुआ सीमा सर्वे बताया जाता है. उस समय महाराष्ट्र और तत्कालीन आंध्र प्रदेश के बीच सीमा से जुड़े विवादों को लेकर सर्वे और सीमांकन की प्रक्रिया हुई थी. इसी दौरान पवार परिवार की जमीन और मकान के बीच से राज्य की सीमा निर्धारित हो गई.
परिवार के सदस्य उत्तम पवार के मुताबिक, घर में रहने वाले लोगों के लिए यह स्थिति अब सामान्य हो चुकी है. उन्होंने बताया कि रसोई तेलंगाना वाले हिस्से में है, जबकि परिवार के कुछ सदस्य महाराष्ट्र की ओर बने कमरों में सोते हैं. यानी एक ही घर में रोजमर्रा के काम करते हुए परिवार दो राज्यों की सीमा के बीच जीवन बिताता है.
इसके अलावा पवार परिवार के अनुसार, वे दोनों राज्यों की ग्राम पंचायतों से जुड़े हैं और संबंधित नियमों का पालन करते हैं. परिवार को दोनों राज्यों की कुछ सरकारी योजनाओं का लाभ भी मिलता है. इसके साथ घर में महाराष्ट्र और तेलंगाना, दोनों राज्यों के रजिस्ट्रेशन वाले वाहन होने की बात भी सामने आई है. परिवार का कहना है कि सीमा घर के बीच से गुजरने के बावजूद उन्हें किसी बड़ी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता। पानी, बिजली और अन्य जरूरी सुविधाओं का इस्तेमाल सामान्य तरीके से होता है.
महाराष्ट्र और तेलंगाना के बीच सीमा को लेकर कई गांवों पर लंबे समय से विवाद रहा है. ऐसे में एक ही घर का दो राज्यों में बंटा होना इसे और भी खास बना देता है. हालांकि पवार परिवार के लिए यह अब कोई विवाद नहीं, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है.