नई दिल्ली: आजकल नींबू-शहद के फेस पैक, हल्दी के मास्क और रातोंरात असर दिखाने वाले घरेलू नुस्खे सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं. ये उपाय सस्ते, आसान और प्राकृतिक लगते हैं, इसलिए लोग बिना सोचे-समझे इन्हें अपनी त्वचा पर आजमाने लगते हैं. लेकिन त्वचा विशेषज्ञों का कहना है कि बिना सही जानकारी के घर पर बने स्किनकेयर उपाय फायदे से ज्यादा नुकसान पहुंचा सकते हैं. त्वचा विशेषज्ञ की मानें तो DIY स्किनकेयर से जुड़े कुछ ऐसे खतरे हैं जिनके बारे में आमतौर पर कोई बात नहीं करता, लेकिन उन्हें जानना बहुत जरूरी है.
हमारी त्वचा की एक प्राकृतिक सुरक्षा परत होती है, जो नमी को बनाए रखती है और बाहरी गंदगी व कीटाणुओं से बचाती है. बेकिंग सोडा, बिना पतला किया गया एसेंशियल ऑयल और खुरदरे स्क्रब इस परत को धीरे-धीरे कमजोर कर सकते हैं.
जब यह परत टूट जाती है, तो त्वचा ज्यादा संवेदनशील हो जाती है. इससे सूखापन, जलन, लालिमा और कभी-कभी संक्रमण तक हो सकता है. खास बात यह है कि इस परत को ठीक होने में कई हफ्ते या महीने भी लग सकते हैं.
अक्सर लोग सोचते हैं कि जो चीज प्राकृतिक है, वह पूरी तरह सुरक्षित होगी. लेकिन नींबू का रस, सेब का सिरका, लहसुन और हल्दी जैसी चीजें अपना एक खास अम्ल का गुण रखती हैं.
अगर इन्हें सही मात्रा में न मिलाया जाए या ज्यादा देर तक त्वचा पर लगाया जाए, तो इससे जलन, लाल दाने, छाले और लंबे समय तक रहने वाली त्वचा समस्याएं हो सकती हैं.
कुछ घरेलू नुस्खे त्वचा को धूप के प्रति ज्यादा संवेदनशील बना देते हैं. खासतौर पर साइट्रस फल, एसेंशियल ऑयल और घर पर किए गए पील्स ऐसा असर दिखा सकते हैं.
ऐसी स्थिति में थोड़ी देर धूप में निकलने से भी सनबर्न, टैनिंग या गहरे काले धब्बे हो सकते हैं. सूजन के बाद होने वाले ये दाग-धब्बे लंबे समय तक बने रह सकते हैं.
घर पर बने स्किनकेयर प्रोडक्ट्स में कोई प्रिज़रवेटिव नहीं होता, इसलिए वे जल्दी खराब हो जाते हैं. पुराने या ठीक से न रखे गए पैक का दोबारा इस्तेमाल करने से त्वचा पर बैक्टीरिया या फंगस लग सकता है. अगर त्वचा पर पहले से मुंहासे, कट या घाव हों, तो संक्रमण का खतरा और बढ़ जाता है.
घरेलू नुस्खे अक्सर समस्या की जड़ तक नहीं पहुंचते, बल्कि केवल लक्षणों को छिपा देते हैं. लगातार मुंहासे, दाग-धब्बे, खुजली या बालों का झड़ना हार्मोनल, एलर्जी या किसी त्वचा रोग का संकेत हो सकता है. ऐसे में बार-बार घरेलू उपाय करने से सही इलाज में देरी हो जाती है, जिससे समस्या और भी गंभीर बन सकती है.