नई दिल्ली: होली 2026 अब सिर्फ रंगों की बौछार तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह व्यक्तिगत पसंद भी बन गई है. यह सहजता और अभिव्यक्ति का उत्सव बन चुकी है. खासकर जेनZ के लिए यह त्योहार परंपरा और आधुनिक सोच का दिलचस्प मेल है. कोई कैमरे के लिए परफेक्ट दिखने वाली सूखी होली चुन रहा है, तो कोई पानी की मस्ती में बचपन की यादें ढूंढ रहा है. सवाल यह नहीं कि सही क्या है, बल्कि यह है कि किसे क्या बेहतर लगता है.
आज के युवा त्योहार को अपनी सुविधा और सोच के अनुसार ढाल रहे हैं. अपार्टमेंट संस्कृति, पानी की कमी, सोशल मीडिया की मौजूदगी और व्यस्त जीवनशैली ने होली के स्वरूप को बदल दिया है. कुछ लोग हल्के गुलाल और सलीके से सजे समारोह को प्राथमिकता दे रहे हैं, जबकि कुछ अब भी पिचकारी और पानी की धूम को ही असली मजा मानते हैं.
कई युवाओं का मानना है कि सूखी होली ज्यादा व्यवस्थित और आरामदायक होती है. क्योकि इसमें कम गंदगी और कम अव्यवस्था होती है. इस कारण ही जेनG को सूखी होली पसंद आती है. ये इसके बड़े फायदे हैं. सफेद कपड़ों पर हल्के रंगों का गुलाल, तस्वीरों के लिए परफेक्ट बैकग्राउंड और बिना ज्यादा अफरा-तफरी के जश्न आज की जनरेशन को खूब भाता है.
आज के त्योहारों पर सोशल मीडिया का असर साफ दिखाई देता है. तस्वीरें और वीडियो त्योहार का हिस्सा बन चुके हैं. हालांकि कई युवा मानते हैं कि इंस्टाग्राम रील्स और फोटो जरूरी हैं, लेकिन असली खुशी दोस्तों के साथ बिताए समय में ही मिलती है. यानी वह ऑनलाइन और सोशल मीडिया के दौर के बीच संतुलन बनाने की कोशिश करते हैं.
दूसरी ओर, कई लोग मानते हैं कि बिना पानी के होली अधूरी है. पिचकारियों की बौछार, रंगों से भीगे कपड़े और अनगिनत मस्ती यही त्योहार की असली पहचान है. उनके लिए यह सिर्फ त्योहार नहीं, बल्कि बचपन की यादों से जुड़ा अनुभव है.
अंततः 2026 की होली सबके लिए एक समान नहीं होगी. कई लोग इसे सादगी से मनाएंगे, तो कई इसे धूमधाम से मनाएंगे. ऐसे में यह कहा जा सकता है कि जेनरेशन Z परंपरा को खत्म नहीं कर रही, बल्कि उसे अपने अंदाज में नया रूप दे रही है.