Review: ‘India’s AI Through Her Lens’ में AI के दौर में महिलाओं की बदलती भूमिका और भारत के भविष्य की झलक

निमिषा झा की किताब ‘India’s AI Through Her Lens’ AI के बढ़ते प्रभाव और खासकर महिलाओं की जिंदगी में हो रहे बदलावों को समझने की कोशिश करती है. किताब तकनीकी पहलुओं के बजाय AI, समाज, जेंडर और पब्लिक पॉलिसी के बीच के रिश्ते पर फोकस करती है.

Date Updated Last Updated : 25 August 2026, 07:03 PM IST
फॉलो करें:
Courtesy: JBT

नई दिल्ली: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI आज हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बनता जा रहा है। सरकार से लेकर बड़ी कंपनियों तक, हर जगह AI के इस्तेमाल और इसके भविष्य को लेकर चर्चा हो रही है. लेकिन इस पूरी बहस में एक सवाल अक्सर पीछे छूट जाता है कि आखिर इस तकनीकी बदलाव का आम लोगों, खासकर महिलाओं की जिंदगी पर क्या असर पड़ रहा है?

निमिषा झा की किताब ‘India’s AI Through Her Lens: How Artificial Intelligence Is Reshaping the Lives of India’s Women’ इसी सवाल को समझाने की कोशिश करती है कि AI हमारी जिंदगी और समाज को किस तरह बदल रहा है। किताब में AI की तकनीकी बारीकियों के बजाय इसके रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ने वाले असर पर ध्यान दिया गया है. इसमें महिलाओं, जेंडर, गवर्नेंस और पब्लिक पॉलिसी से जुड़े पहलुओं के साथ यह भी बताया गया है कि तेजी से बढ़ती AI तकनीक हमारे समाज को किस तरह प्रभावित कर सकती है।

AI सिर्फ तकनीक नहीं, समाज का भी हिस्सा

किताब की खास बात यह है कि इसमें AI को न तो हर समस्या का समाधान बताया गया है और न ही इसे किसी बड़े खतरे के तौर पर पेश किया गया है. इसके बजाय, लेखिका यह समझाने की कोशिश करती हैं कि AI को बनाने और इस्तेमाल करने वाले लोगों की सोच, प्राथमिकताएं और संस्थाएं इस तकनीक को किस तरह प्रभावित करती हैं. यानी सवाल सिर्फ यह नहीं है कि AI क्या कर सकता है, बल्कि यह भी है कि AI हमारे समाज को किस दिशा में ले जा रहा है।

भारतीय नजरिए से AI को देखने की कोशिश

AI को लेकर दुनिया भर में काफी चर्चा हो रही है, लेकिन हर देश की अपनी सामाजिक और आर्थिक परिस्थितियां होती हैं। भारत में भाषाओं, संस्कृतियों, सामाजिक वर्गों और संस्थाओं की विविधता काफी ज्यादा है। ऐसे में दूसरे देशों में बनाए गए AI के नजरिए या मॉडल भारत की हर स्थिति पर पूरी तरह लागू हों, यह जरूरी नहीं है।

निमिषा झा की किताब इसी बात को ध्यान में रखते हुए AI को भारतीय परिस्थितियों के साथ जोड़कर दिखाती है। इसमें यह समझाने की कोशिश गई है कि भारत में तेजी से बढ़ती तकनीक समाज के अलग-अलग हिस्सों को किस तरह प्रभावित कर सकती है।

महिलाओं की भूमिका सिर्फ यूजर तक सीमित नहीं

किताब का एक अहम हिस्सा तकनीक की दुनिया में महिलाओं की भूमिका से भी जुड़ा है। महिलाओं को सिर्फ AI की उपयोगकर्ता या इससे मिलने वाले लाभ की हकदार के तौर पर नहीं दिखाया गया है। किताब इस बात पर भी जोर देती है कि महिलाएं तकनीक से जुड़े फैसलों, नेतृत्व और नीति बनाने की प्रक्रिया में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

यह पहलू इसलिए भी जरूरी है क्योंकि AI का असर आने वाले समय में शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य, वित्त और सरकारी सेवाओं जैसे कई क्षेत्रों पर बढ़ने वाला है। ऐसे में महिलाओं की भागीदारी सिर्फ जरूरी नहीं, बल्कि तकनीक को ज्यादा समावेशी बनाने के लिए अहम भी है।

आसान भाषा में समझाया गया गंभीर विषय

AI जैसे विषय पर लिखना अक्सर चुनौतीपूर्ण होता है, क्योंकि इसमें तकनीकी शब्द और जटिल अवधारणाएं काफी होती हैं। हालांकि, इस किताब में इन मुद्दों को अपेक्षाकृत सरल और समझने योग्य तरीके से सामने रखने की कोशिश की गई है। यही वजह है कि इसे पढ़ने के लिए कंप्यूटर साइंस की जानकारी होना जरूरी नहीं है।

किताब में AI से जुड़ी नीतियों, रिसर्च और विशेषज्ञों की चर्चाओं को भी शामिल किया गया है, जिससे विषय को समझना आसान हो जाता है। अच्छी बात यह है कि इन सबके बावजूद भाषा काफी सरल और सहज रखी गई है, इसलिए इसे पढ़ने के लिए किसी खास तकनीकी या अकादमिक जानकारी की जरूरत नहीं पड़ती।

किताब की लेखन शैली है संतुलित

AI को लेकर आजकल दो तरह की बातें ज्यादा सुनने को मिलती हैं पहली या तो इसे भविष्य बदलने वाली क्रांतिकारी तकनीक बताया जाता है या फिर इससे जुड़े खतरों को लेकर चिंता जताई जाती है। यह किताब इन दोनों के बीच संतुलित रास्ता अपनाती है। लेखिका ने AI को लेकर किसी तरह का डर या सनसनी पैदा करने के बजाय उसके फायदे, चुनौतियों और सामाजिक असर पर गंभीरता से बात की है। अलग-अलग उदाहरणों और नीतिगत मुद्दों के जरिए विषय को समझाने की भी कोशिश की गई है।

बेशक, कुछ पाठकों को इसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर AI से जुड़े नियमों या तकनीक के कुछ और पहलुओं पर ज्यादा विस्तार की उम्मीद हो सकती है। लेकिन यह बात किताब की अहमियत को कम नहीं करती बल्कि अलग-अलग सवालों को सामने रखकर यह पाठकों को अपनी राय बनाने का मौका देती है।

AI के दौर में क्यों जरूरी है यह किताब?

भारत में AI का इस्तेमाल आने वाले वर्षों में और तेजी से बढ़ने वाला है। इसका असर सिर्फ टेक कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी सेवाओं, शिक्षा, रोजगार, स्वास्थ्य और आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी तक पहुंचेगा। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि तकनीक का विकास किसके लिए हो रहा है और इसका फायदा समाज के कितने लोगों तक पहुंच रहा है।

‘India’s AI Through Her Lens’ इसी दिशा में यह याद दिलाती है कि AI का भविष्य सिर्फ उसकी तकनीकी क्षमता या उससे होने वाली कमाई से तय नहीं होगा। यह भी मायने रखेगा कि AI समाज में समान अवसर, निष्पक्षता और मानवीय गरिमा को कितना बढ़ावा देता है। कुल मिलाकर, यह किताब AI के बारे में सिर्फ जानकारी देने के बजाय पाठकों को कुछ जरूरी सवालों पर सोचने के लिए मजबूर करती है। इसके साथ ही तकनीक किस तरह का समाज बना रही है और उस समाज में महिलाओं की भूमिका क्या होगी, यही सवाल इस किताब को खास बनाते हैं।

सम्बंधित खबर