India-China relations: मार्च 2025 में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक गोपनीय पत्र लिखा, जिसमें उन्होंने अमेरिका के साथ चल रहे व्यापारिक युद्ध में भारत का साथ मांगा. ब्लूमबर्ग की हालिया रिपोर्ट ने इस पत्र की गुप्त बातों को उजागर किया है.
इस पत्र में जिनपिंग ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीतियों के खिलाफ मजबूत रणनीति और भारत-चीन संबंधों को बेहतर बनाने पर जोर दिया. पत्र में एक अज्ञात व्यक्ति का जिक्र भी किया गया, जो इस समझौते में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, हालांकि इसका नाम उजागर नहीं किया गया.
ट्रेड वॉर में चीन की रणनीति
ब्लूमबर्ग के अनुसार, जिनपिंग ने पत्र में अमेरिका के साथ टैरिफ युद्ध को चीन के आर्थिक हितों के लिए हानिकारक बताया. उस समय दोनों देशों के बीच टैरिफ 250% तक पहुंच चुका था. जिनपिंग ने भारत से इस व्यापारिक जंग में साथ देने की गुहार लगाई, ताकि दोनों देश मिलकर अमेरिका को कड़ा जवाब दे सकें.
इस पत्र को पूरी तरह गोपनीय रखने की कोशिश की गई थी. भारत ने जून 2025 तक इस पत्र का कोई आधिकारिक जवाब नहीं दिया और इस मुद्दे पर मौन रहा. हालांकि, जब अमेरिका और चीन के बीच व्यापारिक तनाव कम हुआ, तब भारत ने चीन के साथ संबंध सुधारने की दिशा में कदम बढ़ाए.
भारत-चीन के बीच बढ़ती कूटनीतिक नजदीकियां
जून 2025 के बाद, भारत ने चीन के साथ कूटनीतिक वार्ता शुरू की. भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने चीन का दौरा किया, जबकि चीनी विदेश मंत्री वांग यी नई दिल्ली आए.
इन मुलाकातों ने दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत और चीन अब व्यापारिक सहयोग की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं.
ट्रंप की गलतियों ने बदला समीकरण
अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों के अनुसार, डोनाल्ड ट्रंप की दो बड़ी भूलों ने भारत और चीन को करीब लाने में अहम भूमिका निभाई. पहली, ट्रंप ने भारत-पाकिस्तान सीजफायर को लेकर गलत दावे किए, जिससे भारत नाराज हुआ.
दूसरी ट्रंप ने भारत पर 50% टैरिफ थोपने की घोषणा की, जिसने भारत-अमेरिका संबंधों में दरार डाल दी. इन गलतियों का परिणाम यह हुआ कि भारत ने दक्षिण एशिया में अपने पुराने सहयोगी अमेरिका से दूरी बनाई और चीन के साथ कूटनीतिक और व्यापारिक रिश्तों को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए.
भारत-चीन सहयोग
जिनपिंग के पत्र और उसके बाद की कूटनीतिक गतिविधियों ने भारत-चीन संबंधों में नई संभावनाओं को जन्म दिया है. दोनों देश अब वैश्विक मंच पर एक-दूसरे के साझेदार के रूप में उभर रहे हैं, जो वैश्विक व्यापार और कूटनीति में नए समीकरण बना सकता है.