'पाकिस्तानी मध्यस्थता के जरिए मिले अमेरिका के नए प्रस्तावों की समीक्षा कर रहे हैं', ईरान ने कहा

ईरान ने कहा है कि वह पाकिस्तानी मध्यस्थता के जरिये मिले अमेरिका के नए प्रस्तावों की समीक्षा कर रहा है. ईरान ने साफ किया कि वह अपनी बातचीत की शर्तों में कोई समझौता नहीं करेगा.

Date Updated Last Updated : 18 April 2026, 10:43 PM IST
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ईरान ने शनिवार को एक महत्वपूर्ण बयान में पुष्टि की कि उसे पाकिस्तानी मध्यस्थता के ज़रिये अमेरिका की ओर से कुछ नए प्रस्ताव मिले हैं और फिलहाल उनकी समीक्षा की जा रही है. ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने बताया कि पाकिस्तानी सेना प्रमुख ने तेहरान का दौरा किया और दोनों पक्षों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाई. हालांकि, ईरान ने यह भी स्पष्ट कर दिया कि वह अपनी बातचीत की रणनीति में कोई नरमी नहीं लाएगा और पूरी ताकत से अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करेगा. यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है, जब अमेरिका और ईरान के बीच प्रतिबंधों और परमाणु वार्ता को लेकर तनाव जारी है.

पाकिस्तान ने निभाई मध्यस्थ की भूमिका 

ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल ने अपने बयान में कहा, “हाल के दिनों में पाकिस्तानी सेना के कमांडर जब तेहरान में थे, तो उन्होंने मध्यस्थ और बिचौलिए के रूप में काम किया. इसी दौरान अमेरिकियों की ओर से कुछ नए प्रस्ताव रखे गए.” काउंसिल ने पुष्टि की कि ईरान इन प्रस्तावों की समीक्षा कर रहा है और अभी तक उन पर कोई जवाब नहीं दिया गया है. हालाँकि, बयान में यह नहीं बताया गया कि आखिर ये प्रस्ताव किस मुद्दे पर हैं – परमाणु कार्यक्रम को लेकर, प्रतिबंधों को हटाने को लेकर, या क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर. लेकिन इतना साफ है कि पाकिस्तान ने एक बार फिर दो विरोधी देशों के बीच पुल का काम किया है. इससे पहले भी पाकिस्तान अमेरिका-ईरान के बीच कई मौकों पर संदेशों के आदान-प्रदान में मदद करता रहा है.

ईरान का सख्त रुख, कोई समझौता नहीं

अपने बयान में ईरान ने यह भी साफ कर दिया कि उसकी बातचीत करने वाली टीम “ज़रा भर समझौता, पीछे हटना या नरमी नहीं दिखाएगी और पूरी ताकत से ईरानी राष्ट्र के हितों की रक्षा करेगी.” यह बयान उस समय आया है, जब ईरान पर अमेरिकी प्रतिबंधों के कारण उसकी अर्थव्यवस्था पर गहरा संकट है. ईरान चाहता है कि अमेरिका पहले प्रतिबंध हटाए, जबकि अमेरिका चाहता है कि ईरान पहले अपने परमाणु कार्यक्रम पर लगाम लगाए. ईरान की यह ताज़ा टिप्पणी दिखाती है कि वह कूटनीतिक रास्ते को पूरी तरह बंद नहीं कर रहा है, लेकिन साथ ही अपनी सुरक्षा और संप्रभुता के मामलों में कोई रियायत देने के मूड में भी नहीं है.

तनाव के बीच नई उम्मीद या महज़ औपचारिकता? 

विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान का यह मध्यस्थता प्रयास अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से चली आ रही गतिरोध की स्थिति में एक नई कड़ी हो सकता है. हाल के वर्षों में दोनों देशों के बीच सीधी बातचीत लगभग ठप पड़ी है. खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव, ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर पश्चिमी देशों की चिंता और इज़राइल के साथ ईरान के बढ़ते टकराव के बीच यह कूटनीतिक पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

हालांकि, ईरान का यह कहना कि वह “अभी समीक्षा कर रहा है और कोई जवाब नहीं दिया है”, यह संकेत देता है कि फिलहाल कोई त्वरित समाधान निकलता नहीं दिख रहा. फिलहाल सबकी निगाहें इस बात पर हैं कि ईरान इन प्रस्तावों पर औपचारिक रुख कब और क्या लेता है. क्या यह प्रस्ताव प्रतिबंधों में ढील लाने से जुड़े हैं या फिर परमाणु समझौते को पुनर्जीवित करने से – यह आने वाले दिनों में साफ हो जाएगा.

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