सिर्फ 1 ऑपरेटर और 96 खूंखार ड्रोन! चीन ने बना दिया बिना इंसान वाला हत्यारा स्वार्म

चीन ने मार्च 2026 में 'एटलस' AI ड्रोन स्वार्म सिस्टम का प्रदर्शन किया, जो बिना किसी इंसान के हस्तक्षेप के दुश्मन को खुद ढूंढकर मार सकता है. एक ऑपरेटर के जरिए 96 ड्रोन स्वायत्त रूप से टोही, जैमिंग और हमला करते हैं.

Date Updated Last Updated : 31 May 2026, 08:09 AM IST
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Courtesy: Gemini

नई दिल्ली: चीन ने युद्ध की दुनिया में एक डरावना कदम आगे बढ़ा दिया है. मार्च 2026 में चीनी मीडिया ने 'एटलस' नाम के एक खास ड्रोन स्वार्म सिस्टम का पूरा प्रदर्शन कर दुनिया को चौंका दिया. यह सिस्टम बिना किसी इंसान की मदद के दुश्मन को खुद ढूंढता है, पहचानता है और उसे नष्ट कर देता है.

क्या है एटलस सिस्टम?

यह पूरा सिस्टम स्वार्म-2 ग्राउंड कॉम्बैट व्हीकल, कमांड व्हीकल और सपोर्ट व्हीकल से बना है. 25 मार्च 2026 को दिखाए गए परीक्षण में टेस्ट मैदान में तीन एक जैसे लक्ष्य रखे गए. टोही ड्रोन ने इनमें से असली लक्ष्य को पहचाना और जानकारी आगे भेज दी. फिर स्वार्म-2 व्हीकल ने हर तीन सेकंड में फिक्स्ड-विंग ड्रोन छोड़ने शुरू कर दिए.

एक ऑपरेटर, 96 ड्रोन

चीनी इलेक्ट्रॉनिक्स टेक्नोलॉजी ग्रुप द्वारा बनाया गया यह सिस्टम कुछ ही मिनटों में 96 ड्रोन हवा में उतार सकता है. इन सबको सिर्फ एक ऑपरेटर संभालता है. बाकी काम पूरी तरह एआई के कंट्रोल में होता है. ड्रोन आपस में खुद बातचीत करते हैं, टोही करते हैं, दुश्मन के सिग्नल जाम करते हैं और हमला भी खुद तय करके अंजाम देते हैं.

इंसान की जरूरत खत्म

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि पूरे हमले में किसी इंसान ने न लक्ष्य चुना और न हथियार चलाया. एआई एल्गोरिदम ने सब कुछ खुद तय किया. सैन्य विशेषज्ञों का कहना है कि ये ड्रोन युद्ध के बदलते माहौल के हिसाब से खुद को तुरंत ढाल लेते हैं, जो इंसानी नियंत्रण से काफी आगे की बात है.

समुद्र पर भी ताकत

उसी दिन चीन ने L30 नाम के बिना चालक वाले समुद्री जहाजों के स्वार्म का भी अभ्यास दिखाया. गुआंगडोंग प्रांत के झुहाई तट के पास ये जहाज बिना किसी क्रू के स्वतंत्र रूप से चलते हुए एक कमांड से काम कर रहे थे. चीन का यह प्रदर्शन साफ संकेत देता है कि भविष्य के युद्ध में इंसानी सैनिकों की जगह तेजी से स्वायत्त हथियार ले रहे हैं.

एटलस जैसे सिस्टम न सिर्फ तेज हैं बल्कि इंसानी गलतियों से भी मुक्त माने जा रहे हैं. दुनिया के दूसरे देश अब इस नई चुनौती पर नजर रखे हुए हैं.

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