Trump tariffs: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ट्रंप को विश्व के किसी भी देश पर व्यापक टैरिफ थोपने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है. हालांकि, अदालत ने टैरिफ को तत्काल प्रभाव से हटाने के बजाय 14 अक्टूबर तक लागू रहने की अनुमति दी, ताकि ट्रंप प्रशासन सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सके. यह फैसला न्यूयॉर्क के एक विशेष संघीय व्यापार कोर्ट के मई 2025 के निर्णय को और मजबूती प्रदान करता है.
कोर्ट ने किन टैरिफ पर सुनाया फैसला?
अमेरिकी अपील कोर्ट ने उन टैरिफ पर फैसला सुनाया, जो ट्रंप ने अप्रैल 2025 में कई देशों पर लागू किए थे. इनमें चीन, कनाडा, और मैक्सिको जैसे देशों पर लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ शामिल हैं. ट्रंप ने 2 अप्रैल को 'लिबरेशन डे' की घोषणा करते हुए इन टैरिफ को लागू किया था, जिसका आधार 1977 का इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) था. उनका दावा था कि ये टैरिफ अमेरिका के व्यापार घाटे को कम करने के लिए आवश्यक हैं.
ट्रंप प्रशासन की कोर्ट में दलीलें
ट्रंप प्रशासन ने कोर्ट में दलील दी कि टैरिफ को रद्द करने से अमेरिकी खजाने को भारी नुकसान होगा. प्रशासन के अनुसार, जुलाई 2025 तक टैरिफ से 159 अरब डॉलर (लगभग 14 लाख करोड़ रुपये) का राजस्व प्राप्त हुआ, जो पिछले वर्ष की तुलना में दोगुना है.
यदि ये टैरिफ हटाए गए, तो वसूले गए आयात करों का कुछ हिस्सा वापस करना पड़ सकता है, जिससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को गंभीर आर्थिक झटका लगेगा. प्रशासन ने यह भी तर्क दिया कि टैरिफ हटाने से ट्रंप की भविष्य में टैरिफ लागू करने की नीति कमजोर हो सकती है, जिससे अमेरिका की व्यापारिक स्थिति और कमजोर होगी.
कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
7-4 के बहुमत से दिए गए फैसले में कोर्ट ने कहा कि कांग्रेस ने कभी भी राष्ट्रपति को असीमित टैरिफ लगाने की शक्ति देने का इरादा नहीं जताया. कोर्ट ने पाया कि ट्रंप ने IEEPA के तहत अपनी आपातकालीन शक्तियों का दुरुपयोग किया. हालांकि, स्टील और एल्यूमिनियम जैसे कुछ क्षेत्रों पर लगे टैरिफ इस फैसले से प्रभावित नहीं होंगे.
भारत पर क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत पर लगाए गए टैरिफ को अन्य कानूनी प्रावधानों के तह लागू किया गया था, इसलिए इस फैसले का भारत पर सीधा प्रभाव सीमित हो सकता है. फिर भी, टेक्सटाइल, ज्वेलरी, और सीफूड जैसे क्षेत्रों को राहत मिल सकती है.