ट्रंप के 50% टैरिफ से भारत के प्रमुख उद्योगों पर संकट! कपड़ा, रत्न, झींगा और अन्य सेक्टर्स पर भारी असर

ये उद्योग अपनी आय का बड़ा हिस्सा अमेरिकी बाजार से कमाते हैं. ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का अमेरिका को निर्यात 87 अरब डॉलर से घटकर 49.6 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जो 40-45% की भारी गिरावट को दर्शाता है.

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Trump tariff: 27 अगस्त 2025 से अमेरिका ने भारत पर 50% का भारी-भरकम टैरिफ लागू कर दिया है. यह टैरिफ दो चरणों में लगाया गया है. पहले 25% का बेस टैरिफ और फिर रूस से तेल खरीदने की सजा के रूप में अतिरिक्त 25% टैरिफ. इस फैसले से भारत के श्रम-प्रधान उद्योग जैसे कपड़ा, रत्न और आभूषण, झींगा, कालीन, फर्नीचर और हस्तशिल्प गहरे संकट में आ सकते हैं.

ये उद्योग अपनी आय का बड़ा हिस्सा अमेरिकी बाजार से कमाते हैं. ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का अमेरिका को निर्यात 87 अरब डॉलर से घटकर 49.6 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है, जो 40-45% की भारी गिरावट को दर्शाता है.

कपड़ा उद्योग पर मंडराया खतरा

भारत का कपड़ा उद्योग, जो अपने निर्यात का लगभग 33% हिस्सा अमेरिका को भेजता है, इस टैरिफ से सबसे अधिक प्रभावित होगा. भारतीय कपड़े और परिधान अब अमेरिकी बाजार में बांग्लादेश, वियतनाम और कंबोडिया जैसे प्रतिस्पर्धी देशों की तुलना में महंगे हो जाएंगे.

उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि इससे न केवल मुनाफा कम होगा, बल्कि बड़े पैमाने पर नौकरियां भी खतरे में पड़ सकती हैं. कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्री (CITI) ने सरकार से तत्काल नकद सहायता और ऋण चुकौती पर अस्थायी रोक की मांग की है ताकि इस संकट से निपटा जा सके.

समुद्री निर्यात पर भारी मार

झींगा निर्यात भारत के लिए एक प्रमुख आय स्रोत है, जिसका लगभग 48% राजस्व अमेरिका से आता है. 50% टैरिफ के कारण झींगा अमेरिकी बाजार में महंगा हो जाएगा, जिससे मांग में भारी कमी और निर्यात में 70% तक की गिरावट की आशंका है.

कोलकाता के समुद्री खाद्य निर्यातक योगेश गुप्ता के अनुसार, भारतीय झींगा पहले से ही 2.49% एंटी-डंपिंग और 5.77% काउंटरवेलिंग ड्यूटी झेल रहा है. 

रत्न और आभूषण उद्योग पर संकट

रत्न और आभूषण उद्योग, जो अमेरिका में 10 अरब डॉलर का निर्यात करता है, भी इस टैरिफ से बुरी तरह प्रभावित होगा. यह उद्योग वैश्विक व्यापार का 30% हिस्सा अमेरिका से कमाता है. 50% टैरिफ के कारण भारतीय आभूषण अमेरिकी खरीदारों के लिए महंगे हो जाएंगे, जिससे पॉलिशिंग और मैन्युफैक्चरिंग इकाइयों में रोजगार पर खतरा मंडराने लगा है. निर्यातकों ने सरकार से विशेष राहत योजना शुरू करने की मांग की है.

कालीन, फर्नीचर और हस्तशिल्प पर भी असर

ये उद्योग अमेरिका पर बहुत अधिक निर्भर हैं. टैरिफ के कारण इनके उत्पाद महंगे हो जाएंगे, जिससे मांग कम होगी और भारत के निर्यातकों को नुकसान होगा.

इस टैरिफ से वियतनाम, बांग्लादेश, चीन और यहां तक कि पाकिस्तान जैसे देशों को फायदा होगा, क्योंकि इन पर टैरिफ भारत की तुलना में कम है. इससे अमेरिकी खरीदार इन देशों के सस्ते उत्पादों को प्राथमिकता दे सकते हैं, जिससे भारत की बाजार हिस्सेदारी कम हो सकती है.

राहत के लिए भारत सरकार के प्रयास

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट किया है कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों को प्राथमिकता देगा और आर्थिक दबावों का सामना करने के लिए तैयार है. भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौता (BTA) इस संकट से राहत दिला सकता है.