Peter Navarro on India: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पूर्व ट्रेड सलाहकार पीटर नवारो ने भारत की नीतियों को न केवल अनुचित व्यापारिक प्रथाओं से जोड़ा, बल्कि रूस की युद्ध मशीन को वित्तीय सहायता देने का भी आरोप लगाया. नवारो ने दावा किया कि भारत की तेल खरीद रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के युद्ध कोष को मजबूत करती है.
रूस-यूक्रेन युद्ध को 'मोदी का युद्ध' करार
नवारो ने रूस-यूक्रेन युद्ध को "मोदी का युद्ध" करार देते हुए भारत के खिलाफ नस्लीय टिप्पणी की. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भगवा वस्त्रों वाली तस्वीर साझा करते हुए लिखा, "यूक्रेन में शांति का रास्ता नई दिल्ली से होकर जाता है." यह टिप्पणी भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव को और बढ़ाने वाली मानी जा रही है.
भारत की तेल खरीद पर सवाल
नवारो ने दावा किया कि भारत अमेरिकी डॉलर का उपयोग कर सस्ता रूसी कच्चा तेल खरीदता है, जिससे रूस को आर्थिक लाभ मिलता है. उन्होंने कहा कि 2022 से पहले भारत रूसी तेल का केवल 1% आयात करता था, जो अब बढ़कर 30% से अधिक हो गया है.
भारत प्रतिदिन 15 लाख बैरल से अधिक रूसी तेल आयात कर रहा है. नवारो का कहना है कि यह वृद्धि घरेलू मांग से नहीं, बल्कि भारतीय रिफाइनरों के मुनाफाखोरी के कारण हुई है, जो सस्ते रूसी तेल को प्रोसेस कर यूरोप, अफ्रीका और एशिया में ईंधन निर्यात करते हैं.
भारत की रिफाइनिंग नीति पर निशाना
नवारो ने भारत को "क्रेमलिन का रिफाइनिंग केंद्र" करार देते हुए कहा कि 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद भारत ने रूसी तेल पर अपनी निर्भरता बढ़ाई. उन्होंने बताया कि सात देशों के समूह (G7) द्वारा रूसी तेल पर 60 डॉलर प्रति बैरल की मूल्य सीमा लगाने के बाद भारत ने इसका लाभ उठाया. नवारो का आरोप है कि भारत की यह रणनीति न केवल आर्थिक है, बल्कि यह यूक्रेन में हिंसा को अप्रत्यक्ष रूप से बढ़ावा देती है.
भारत-अमेरिका व्यापार पर विवाद
नवारो ने भारत पर उच्च टैरिफ और गैर-टैरिफ बाधाओं के जरिए अमेरिकी निर्यात को प्रतिबंधित करने का भी आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि अमेरिकी उपभोक्ता भारतीय सामान खरीदते हैं, लेकिन भारत अमेरिकी उत्पादों को अपने बाजार में प्रवेश करने से रोकता है.
यह विवाद भारत और अमेरिका के बीच व्यापारिक तनाव को और गहरा सकता है. नवारो की टिप्पणियों ने भारत की विदेश और व्यापार नीतियों पर सवाल उठाए हैं. हालांकि, भारत ने बार-बार स्पष्ट किया है कि उसकी तेल खरीद नीति राष्ट्रीय हितों और वैश्विक बाजार की मांगों पर आधारित है.