नई दिल्ली: भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्तों को लेकर पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी का एक बयान चर्चा में आ गया है. 14 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस से जुड़े एक कार्यक्रम में जरदारी ने भारत और पाकिस्तान की सोच में अंतर बताते हुए ‘अखंड भारत’ का मुद्दा उठाया.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जरदारी ने कहा कि भारत ‘अखंड भारत’ की विचारधारा में विश्वास करता है, जबकि पाकिस्तान की सोच इससे अलग है. उन्होंने दोनों देशों के लोगों की सोच में अंतर का भी जिक्र किया. पाकिस्तानी राष्ट्रपति ने दावा किया कि पाकिस्तान में हिंदू समुदाय को अपने धर्म का पालन करने की आजादी है. उन्होंने कहा कि पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू भारत जाने के बजाय अपने देश में ही रहना पसंद करेंगे.
जरदारी ने पाकिस्तान की आबादी में हिंदू समुदाय की हिस्सेदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां हिंदू उसी तरह अपनी धार्मिक पहचान के साथ रह सकते हैं, जैसी आजादी उन्हें अन्य जगहों पर मिल सकती है. उन्होंने पाकिस्तान को ऐसे मुसलमानों का देश बताया, जो दूसरे धर्मों को स्वीकार करते हैं.
जरदारी की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते लंबे समय से तनावपूर्ण बने हुए हैं. अपने संबोधन में उन्होंने दोनों देशों के संबंधों के साथ-साथ पाकिस्तान की सेना की भूमिका और क्षेत्र की मौजूदा स्थिति पर भी बात की. उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच विचारों के अंतर को दोनों देशों की नीतियों और नजरिए से जोड़ने की कोशिश की. ‘अखंड भारत’ को लेकर उनका बयान अब राजनीतिक और कूटनीतिक चर्चा का विषय बन गया है.
हालांकि, पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों की स्थिति को लेकर जरदारी के दावों पर सवाल भी उठते रहे हैं. हिंदू समेत अन्य अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े संगठनों ने समय-समय पर उनकी सुरक्षा और अधिकारों को लेकर चिंता जताई है. इन संगठनों की ओर से जबरन धर्म परिवर्तन, अपहरण और धार्मिक स्थलों पर हमलों जैसी घटनाओं का मुद्दा उठाया जाता रहा है. ऐसे में पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों को पूरी धार्मिक स्वतंत्रता मिलने के दावे पर बहस जारी रहती है. जरदारी का ताजा बयान भी इसी वजह से चर्चा में है.